पंजाब कैबिनेट की बैठक में राइट टू बिजनेस एक्ट में संशोधनों को मिली मंजूरी….. लिमिट को बढ़ाकर किया 125 करोड़

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चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई। इन फैसलों में जीएसटी 2.0 में संशोधन, राज्य में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए व्यापार नियमों में ढील, और मोहाली में एक विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कोर्ट की स्थापना शामिल है।

इन फैसलों का उद्देश्य राज्य में आर्थिक सुधार लाना, कानूनी व्यवस्था को मजबूत करना और कारोबार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।

जीएसटी 2.0 में संशोधन और ओटीस स्कीम :  पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने हाल ही में लागू हुई जीएसटी 2.0 की नई दरों पर चर्चा की और कुछ महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन संशोधनों को अब पंजाब विधानसभा में पारित कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम भी पेश की है, जो प्री-जीएसटी टैक्स से संबंधित 20,039 लंबित मामलों के लिए है। यह स्कीम 31 दिसंबर तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी और बकाया राशि सख्ती से वसूल की जाएगी। इस कदम से सरकार को लंबित कर मामलों को निपटाने और राजस्व संग्रह बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मोहाली में बनेगा एनआईए का विशेष कोर्ट :   कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने मोहाली में एक विशेष एनआईए कोर्ट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह कोर्ट आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करेगा। इस कदम से राज्य में आतंकवादी और गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।

पूर्व मंत्री पर मुकदमा चलाने की मंजूरी :  कैबिनेट ने भ्रष्टाचार के एक मामले में पंजाब के पूर्व मंत्री साधु सिंह धरमसोत पर मुकदमा चलाने की भी मंजूरी दे दी है। विजिलेंस ब्यूरो ने जून 2022 में धरमसोत पर भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि उन्होंने ₹1.67 करोड़ की रिश्वत ली थी। कैबिनेट ने इस मामले में राज्यपाल से भी केस चलाने के लिए सिफारिश भेजी है। यह फैसला राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है।

‘राइट टू बिजनेस एक्ट’ में संशोधन :  राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कैबिनेट ने ‘राइट टू बिजनेस एक्ट’ में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। पहले इस अधिनियम के तहत निर्धारित निवेश सीमा ₹25 करोड़ थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹125 करोड़ कर दिया गया है। इसके अलावा, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कारोबारियों को सभी तरह की अनुमतियां 5 से 18 दिनों के भीतर मिल जाएंगी। इस फैसले से राज्य में नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

कुल मिलाकर, पंजाब सरकार ने इन फैसलों के जरिए एक मजबूत, पारदर्शी और उद्योग-हितैषी शासन की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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