चंडीगढ़ : पंजाब सरकार ने सरकारी ऑनलाइन पोर्टल ‘सांझ’ से एफआईआर की प्रतियां डाउनलोड करने के लिए 80 रुपये का शुल्क लगाने वाली अधिसूचना वापस ले ली है। उक्त कदम की विपक्षी दलों और कानूनी विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की थी।
इस फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर की गई थी। इस संबंध में सुशासन और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डीके तिवारी द्वारा 25 मार्च को जारी अधिसूचना में यह कहा गया है, ’28 अक्टूबर और उसके बाद 26 नवंबर को जारी पिछली अधिसूचना के क्रम में पंजाब के राज्यपाल ने आदेश दिया है कि सांझ पोर्टल से एफआईआर डाउनलोड करने के लिए अब से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और न ही सांझ केंद्रों से एफआईआर की प्रतियां प्राप्त करने के लिए आवेदकों से कोई शुल्क लिया जाएगा ।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले विभाग ने 23 मार्च से एफआईआर डाउनलोड करने को शुल्क योग्य बनाने के लिए अधिसूचना जारी की थी. राज्य के गृह विभाग की पहल पर सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा यह अधिसूचना जारी की थी।
सरकार के इस फैसले को बीते बुधवार (25 मार्च) को अधिवक्ता अभिषेक मल्होत्रा और वासु रंजन शांडिल्य ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि यह न्याय तक पहुंच के एक मौलिक और वैधानिक अधिकार का व्यवसायीकरण करता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
वकीलों ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से पंजाब सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया था कि वह 23 मार्च से एफआईआर डाउनलोड करने के लिए लोगों से ली गई राशि वापस करे। सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि केवल ऑनलाइन डाउनलोड के लिए शुल्क लिया जाता है, जबकि एफआईआर की प्रति संबंधित पुलिस स्टेशन से निःशुल्क प्राप्त की जा सकती है।
सरकारी अधिकारियों ने अखबार को बताया कि 23 मार्च तक सांझ पोर्टल पर 41.7 लाख से अधिक एफआईआर डाउनलोड हो चुकी हैं। वहीं, गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार पंजाब में औसतन एक वर्ष में 60,000 एफआईआर दर्ज की जाती हैं।
