प्रमोशनल इंक्रीमेंट मामले में विभाग की दोबारा समीक्षा पर अदालत की आपत्ति, याचिकाकर्ता को 10 हजार रुपये हर्जाना देने के निर्देश
एएम नाथ। शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती आदेश का पालन करने में देरी और उसके क्रियान्वयन में टालमटोल करने पर राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने सरकार को मूल फैसले का पूरी तरह पालन करने के लिए तीन सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता जोगिंद्र कुमार को 10 हजार रुपये हर्जाना देने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को बिना किसी बहानेबाजी के मूल फैसले के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने होंगे। यह आदेश जोगिंद्र कुमार की ओर से दायर निष्पादन याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
मामला ओम प्रकाश बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य से संबंधित है। इस मामले में हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2023 को निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ताओं को 1 अक्तूबर 2012 से मुख्य शिक्षक के पद पर पदोन्नति वेतन वृद्धि (प्रमोशनल इंक्रीमेंट) का लाभ दिया जाए। अदालत ने इस प्रक्रिया को छह सप्ताह के भीतर पूरा करने का आदेश दिया था।
इसके बावजूद आदेश पर अमल नहीं होने के कारण निष्पादन याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने सितंबर 2025 में भी सरकार को अनुपालन हलफनामा या जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।
दूसरे मामले से जोड़कर समीक्षा करने पर जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक, कांगड़ा का एक आदेश अदालत के समक्ष पेश किया। इसमें कहा गया था कि विभाग ने याचिकाकर्ता के मामले की समीक्षा सूर्या प्रभा बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले के संदर्भ में की है।
इस पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब अदालत याचिकाकर्ता के पक्ष में स्पष्ट फैसला सुना चुकी है, तो विभाग को उस फैसले की दोबारा समीक्षा करने या उसे किसी अन्य मामले से जोड़ने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विभाग की जिम्मेदारी फैसले का पालन करना है, न कि उस पर पुनर्विचार करना।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को निर्धारित की है।
