नई दिल्ली, 5 अक्तूबर : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया गया तथा यह भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए पद के कथित दुरुपयोग का एक और उदाहरण है।
राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि अब यह बिना किसी संदेह के स्थापित हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किया। उन्होंने निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर की एक पुरानी प्रेस विज्ञप्ति का स्क्रीनशॉट भी साझा किया।
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद अदालत यह देखना चाहेगी कि फॉर्म में बदलाव किसने किया।
26 सितंबर के निर्वाचन आयोग के बयान पर विवाद
विवाद की पृष्ठभूमि में निर्वाचन आयोग का 26 सितंबर का बयान भी है। आयोग ने कहा था कि SIR के लिए फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। इसके बाद अदालत की सोमवार की टिप्पणी ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलाव और निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। याचिका में आरोप है कि SIR से संबंधित कुछ फैसले अन्य निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए गए।
सीईसी को निलंबित करने की मांग पर अंतरिम राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड की जांच के बाद किसी फैसले में कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो उसे बाद में रद्द किया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि अदालत केवल समाचार रिपोर्टों के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं कर सकती और संबंधित पक्षों का जवाब तथा रिकॉर्ड देखना आवश्यक है।
इस मामले में अब निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब तथा अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर लगाए गए आरोप न्यायिक जांच के दायरे में हैं और सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
