वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन को बंजार में मिलेगी रफ्तार, पंचायत प्रतिनिधियों को दी कानून की जानकारी।
172 सामुदायिक अधिकार पत्र स्वीकृत, वितरण और राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की तैयारी।
गुशैनी/बंजार(परस राम भारती):- जिला कुल्लू विकास खंड बंजार की सभी 40 ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए 31 अगस्त से शुरू हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम सात चरणों में संपन्न हो गया। प्रशिक्षण में पंचायत प्रधानों, उपप्रधानों और वार्ड पंचों को पंचायती राज अधिनियम, पंचायतों के सुचारु संचालन, विकास कार्यों के क्रियान्वयन तथा वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी गई। 
उपमंडल अधिकारी (नागरिक) बंजार पंकज शर्मा ने बताया कि सभी 40 ग्राम पंचायतों को सात समूहों में बांटकर प्रशिक्षण दिया गया। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में भाग लिया और पंचायत प्रतिनिधियों को उनके दायित्वों तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बारे में जानकारी दी।
दस वर्षों के बाद 172 सामुदायिक वन अधिकार स्वीकृत.
पंकज शर्मा ने बताया कि बंजार उपमंडल में वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता दिलाने के लिए पिछले करीब दस वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में उपमंडल स्तरीय समिति की नियमित बैठकों और मामलों की समीक्षा से इस प्रक्रिया को गति मिली है। अब तक कुल 238 वन अधिकार समितियों में से 172 के सामुदायिक वन अधिकार स्वीकृत हो चुके हैं और उनके अधिकार पत्र प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वन अधिकार अधिनियम के माध्यम से वन क्षेत्रों पर निर्भर समुदायों के परंपरागत, सांस्कृतिक, सामाजिक और देव परंपराओं से जुड़े अधिकारों को कानूनी मान्यता प्रदान की जाती है। अब अधिकार पत्रों के वितरण तथा उन्हें राजस्व और वन विभाग के अभिलेखों में दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।
सहारा संस्था ने दी वन अधिकार कानून की जानकारी.
प्रशिक्षण के दौरान सहारा संस्था के निदेशक राजेंद्र चौहान ने पंचायत प्रतिनिधियों को वन अधिकार अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों से अवगत करवाया। उन्होंने व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े अधिकारों की जानकारी दी।
चौहान ने अधिनियम की धारा 3(2) के अंतर्गत निर्धारित 13 प्रकार के विकास कार्यों के लिए वन भूमि के उपयोग की प्रक्रिया और इसके आठ चरणों के बारे में भी विस्तार से समझाया। उन्होंने ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति, उपमंडल स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समिति की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायतों, ग्राम सभाओं और वन अधिकार समितियों का सक्रिय सहयोग आवश्यक है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने और पात्र व्यक्तियों के दावे नियमानुसार तैयार करवाने में सहयोग देने का आग्रह किया।
सामुदायिक और व्यक्तिगत दावों की स्थिति बताई.
प्रशिक्षण के दौरान दी गई जानकारी के अनुसार, बंजार उपमंडल की वन अधिकार समितियों से संबंधित 102 सामुदायिक अधिकार पत्र उपमंडल स्तरीय समिति को प्राप्त हुए हैं, जबकि 47 अधिकार पत्र जिला स्तरीय समिति के पास हैं। वर्ष 2022 में प्राप्त 24 सामुदायिक अधिकार पत्रों में संबंधित राजस्व गांवों का विवरण ठीक करने के बाद उन्हें संबंधित वन अधिकार समितियों को सौंपा जाना है।
वहीं, व्यक्तिगत वन अधिकारों से संबंधित 12 मामले उपमंडल स्तरीय समिति की ओर से जिला स्तरीय समिति को भेजे जा चुके हैं। नई उपमंडल स्तरीय और जिला स्तरीय समितियों के गठन के बाद इन मामलों में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को वन अधिकार कानून के प्रावधानों और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया। इससे पंचायत स्तर पर वन अधिकारों से जुड़े मामलों को नियमानुसार आगे बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
