बजट में जनता के लिए कुछ नहीं – गारंटियों पर सरकार फेल : राजीव बिन्दल

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रोहित जसवाल। शिमला, 17 मार्च । हिमाचल प्रदेश के वित्त वर्ष 2025-26 के बजट पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इसे जनता के लिए शून्य बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने तीसरे बजट में विकास के लिए कुछ नहीं रखा।
डॉ. बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री के अनुसार बजट का 76 फीसदी हिस्सा वेतन, पेंशन, ब्याज और देय राशियों में चला जाएगा जबकि सिर्फ 24 फीसदी पूंजीगत व्यय के लिए बचेगा। ऐसे में सरकार जनता के लिए कुछ नया नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में केवल 2022 से पहले की सरकार को कोसने का काम किया गया, लेकिन वर्तमान सरकार के बढ़ते कर्ज और उसकी उपयोगिता पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई।
भाजपा अध्यक्ष ने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हाल ही में हिमाचल में दिन-दहाड़े गोलीबारी की घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने बजट में इस पर कोई चर्चा नहीं की। इसके अलावा 1200 स्कूलों और 1600 सरकारी संस्थानों को बंद करने के फैसले पर भी कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने हिमकेयर और आयुष्मान जैसी कल्याणकारी योजनाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार योजनाओं के नाम बदलकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले युवाओं को 5 लाख रोजगार और सरकारी क्षेत्र में 1 लाख नौकरियां देने का वादा किया था लेकिन बजट में इसका कोई उल्लेख नहीं है। 1500 रुपये प्रतिमाह देने की गारंटी भी पूरी नहीं हुई, क्योंकि इसमें ‘पात्र’ शब्द जोड़कर केवल कुछ लोगों तक सीमित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 100 रुपये प्रति लीटर दूध खरीदने का वादा किया था, लेकिन तीन साल बाद भी किसान उम्मीद ही लगाए बैठे हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों, छोटे कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं के लिए भी इस बजट में कुछ नहीं है। डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि सरकार पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा की अधिकांश योजनाओं में केंद्र की मदद से मिल रहे फंड को अपना बताने में लगी है। केवल भाजपा सरकार पर हमला करने और योजनाओं का नाम बदलने तक ही यह बजट सीमित है।
             उन्होंने कहा कि यह बजट हिमाचल प्रदेश की जनता के साथ धोखा और अन्याय है। युवाओं, किसानों और बहनों को ठगने वाला बजट है। हिमाचल की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे प्रदेश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
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