भरमौर-होली कनेक्टिविटी पर बड़ा झटका : सियुंर पुल रावी में गिरा 5 करोड़ का सियुंर पुल लैंडस्लाइड में तबाह, कई गांवों का संपर्क टूटा

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अंतिम चरण में था काम, अचानक भूस्खलन से ढहा पूरा ढांचा

एएम नाथ। (भरमौर) चम्बा : हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। होली-खड़ामुख मार्ग पर सियुंर के पास बन रहा निर्माणाधीन पुल अचानक लैंडस्लाइड की चपेट में आकर पूरी तरह ढह गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिरने के कारण कुछ ही पलों में यह पुल रावी नदी में समा गया, जिससे आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह के समय अचानक पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरना शुरू हुआ। देखते ही देखते यह मलबा सीधे पुल पर आ गिरा और पूरा ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। पुल के गिरते ही तेज आवाज सुनाई दी, जिससे लोग दहशत में आ गए। गनीमत यह रही कि हादसे के समय पुल पर कोई वाहन या व्यक्ति मौजूद नहीं था, वरना बड़ा जानमाल का नुकसान हो सकता था। यह पुल करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा था और इसका निर्माण कार्य वर्ष 2023 में शुरू हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, पुल का काम लगभग पूरा हो चुका था और केवल अंतिम चरण का कार्य बाकी था। ऐसे में इस हादसे ने न केवल निर्माण कार्य को झटका दिया है, बल्कि सरकारी धन का भी बड़ा नुकसान हुआ है।
पुल के गिरने से भरमौर क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। स्थानीय लोगों को अब आवागमन के लिए लंबा और कठिन रास्ता तय करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि दैनिक जीवन प्रभावित न हो।
इस घटना के बाद क्षेत्रीय विधायक डॉ. जनक राज ने मौके का जायजा लिया और प्रशासन को तुरंत राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा जा रहा है, जो लैंडस्लाइड के कारणों का पता लगाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचाव के उपाय सुझाएगी।
हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन की घटनाएं विकास कार्यों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की सुरक्षा और योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी इस समस्या का समाधान निकाल पाता है और प्रभावित लोगों को राहत मिलती है।

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