भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड मेंबरों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव : पंजाब में फिर गरमाई राजनीति

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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में दो अहम पदों की नियुक्ति के नियमों में बदलाव का अधिसूचना जारी कर दी है. इसके बाद से पंजाब की राजनीति गरमा गई है. 13 अप्रैल को जारी अधिसूचना के जरिए मेंबर (इरिगेशन) और मेंबर (पावर) पदों पर चयन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है, जिस पर पंजाब के कई दलों ने कड़ा विरोध जताया है। मामला धीरे धीरे तूल पकड़ता जा रहा है।

भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड एक केंद्रीय निकाय है, जो भाखड़ा और ब्यास नदियों से जुड़े बांधों, बिजली उत्पादन और पानी के वितरण का प्रबंधन करता है. यह बोर्ड खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सिंचाई और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

13अप्रैल को जारी हुआ है यह अधिसूचना : सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार अब मेंबर (इरिगेशन) और मेंबर (पावर) पदों पर नियुक्ति किसी भी राज्य के योग्य उम्मीदवारों में से की जा सकती है. हालांकि, इसमें यह भी कहा गया है कि पंजाब और हरियाणा के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन यह अनिवार्य नहीं होगा।

पहले ये होती थी व्‍यवस्‍था : पहले की व्यवस्था में मेंबर (इरिगेशन) हरियाणा से और मेंबर (पावर) पंजाब से नियुक्त किए जाते थे. अब इस व्‍यवस्‍था को खत्म कर दिया गया है. नई व्‍यवस्‍था लागू हो जाएगी ।

ये रखी गयी योग्यता :  मेंबर (इरिगेशन) के लिए सिविल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री, 20 साल का अनुभव और कम से कम एक साल तक चीफ इंजीनियर के रूप में काम करना जरूरी है. वहीं मेंबर (पावर) के लिए इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री, 20 साल का अनुभव और 66 किलोवाट के पावर प्लांट या ट्रांसमिशन लाइन में कम से कम 5 साल का अनुभव अनिवार्य है।

राजनीति हुई  गरमाई :  पंजाब सरकार के मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस फैसले को ‘पंजाब विरोधी’ बताते हुए कहा कि यह संघीय ढांचे पर हमला है. उन्होंने बीजेपी नेताओं से जवाब देने और फैसला वापस लेने की मांग की है. वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा बडिंग ने आरोप लगाया कि धीरे-धीरे पंजाब के अधिकार छीने जा रहे हैं. उन्होंने नंगल बांध की सुरक्षा में सीआईएसएफ की तैनाती और अब नियुक्तियों में बदलाव को राज्य की हिस्सेदारी कमजोर करने वाला कदम बताया है. शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और कहा कि बोर्ड में पंजाब के अधिकारों से समझौता किया जा रहा है. उन्होंने राज्य सरकार पर केंद्र के साथ समझौते का आरोप लगाते हुए पंजाब के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

 

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