लिल्ह की जनसभा में अनुराग ठाकुर और जयराम ठाकुर पर साधा निशाना, पूर्व सरकार के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
एएम नाथ। चंबा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा पर लोकतंत्र और संविधान के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। गुरुवार को चंबा के लिल्ह में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सांसद अनुराग ठाकुर और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले वोटों की चोरी कर सत्ता हासिल की और बाद में धनबल के सहारे कांग्रेस विधायकों को अपने पाले में करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जनादेश का सम्मान नहीं करने वाली भाजपा अब लोकतंत्र की बात कर रही है।
सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और जनता के मताधिकार की बात करने का नैतिक अधिकार कांग्रेस को है। उन्होंने देश के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि मुगलों, राजाओं और अंग्रेजों के शासन में आम जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार नहीं था। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान और देश की आजादी के बाद ही लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हुई। आज जनता अपने मताधिकार से पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर मुख्यमंत्री तक का चुनाव करती है। मुख्यमंत्री ने भाजपा की पदयात्राओं पर भी सवाल उठाए।
पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से 2022 के बीच हिमाचल प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सातवें स्थान पर पहुंच गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के प्रयासों से प्रदेश पांचवें स्थान पर आया है। उन्होंने कहा कि केवल स्कूल खोलने से शिक्षा का स्तर बेहतर नहीं होता, बल्कि इसके लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जरूरी है।
ओपीएस और अनाथ बच्चों के लिए योजनाओं का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल की है। उन्होंने केंद्र सरकार पर राजस्व घाटा अनुदान बंद कर हिमाचल की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करने का आरोप लगाया। सुक्खू ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद सरकार अनाथ बच्चों को 27 वर्ष की आयु तक सहायता दे रही है। इसके तहत पात्र बच्चों को प्रतिमाह चार हजार रुपये, मकान निर्माण के लिए तीन लाख रुपये और विवाह के लिए दो लाख रुपये दिए जा रहे हैं।
जनक राज पर निशाना, हिमकेयर योजना में गड़बड़ी का आरोप
मुख्यमंत्री ने डॉ. जनक राज पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ा और जियालाल कपूर का टिकट कटवाया। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई हिमकेयर योजना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि योजना के तहत पुरुषों की बच्चेदानी के ऑपरेशन तक के बिल बनाए गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय अस्पतालों में जिम्मेदार पदों पर तैनात अधिकारियों को ऐसी गड़बड़ियों पर निगरानी रखनी चाहिए थी।
मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से विधानसभा में उठाने की नसीहत भी दी। उन्होंने होली-उतराला सड़क और भरमौर अस्पताल में चिकित्सकों की कमी जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
भरमौर की 27 पंचायतों को जनजातीय दर्जा मिलने की उम्मीद
भरमौर विधानसभा क्षेत्र की 27 गैर-जनजातीय पंचायतों को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिलाने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कमेटी गठित करने और मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया। इन पंचायतों की करीब 44 हजार आबादी लंबे समय से यह मांग कर रही है।
स्थानीय लोगों कमल ठाकुर, राजीव कुमार, नरेश कुमार और रविंद्र कुमार का कहना है कि उनकी भाषा, संस्कृति, खानपान और रहन-सहन भरमौर के जनजातीय क्षेत्र से मेल खाते हैं, लेकिन प्रशासनिक तौर पर उन्हें गैर-जनजातीय क्षेत्र में रखा गया है। ग्रामीणों के अनुसार वे भरमौर विधानसभा क्षेत्र में मतदान करते हैं, लेकिन जनजातीय क्षेत्र को मिलने वाली सुविधाओं और अधिकारों से वंचित हैं।
जनजातीय दर्जे की मांग करने वाली पंचायतों में गुराड़, डुलाड़ा, किलोड़, कलमला, कुनेड़, राड़ी, भटवाड़ा, प्रीणा, गाण, बलोठ, खुंदले, लेच, कूंर, छतराड़ी, प्यूहरा, गैहरा, ब्रेही, सुनारा, तागी, लोथल, बकाण, धिमला, बंदला, फागड़ी, दाड़वी, मैहला और चड़ी शामिल हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इन पंचायतों के करीब 95 प्रतिशत गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
जिला मार्केट कमेटी के चेयरमैन ललित ठाकुर ने लिल्ह में आयोजित जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष यह मांग रखी। कमेटी गठित करने के आश्वासन के बाद क्षेत्रवासियों को लंबे समय से लंबित मांग पर सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जगी है।
