महिला पुलिस इंस्पेक्टर अर्शप्रीत कौर भगोड़ा घोषित

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मोगा: पंजाब पुलिस भ्रष्टाचार और नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। अगर इसमें पुलिस का कोई कर्मचारी या अधिकारी शामिल पाया जाता है तो उस पर भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है। बठिंडा में जहां कांस्टेबल अमनप्रीत कौर को पुलिस ने मादक पदार्थ सप्लाई करने के आरोप में गिरफ्तार किया, वहीं मोगा में भी एसएचओ अर्शप्रीत कौर के खिलाफ नशा तस्करों से रिश्वत लेने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है और उसकी तलाश जारी है।

इस बीच, अदालत ने अर्शप्रीत कौर को भगोड़ा घोषित कर दिया है. इसके बाद महिला एसएचओ अर्शप्रीत कौर के खिलाफ कोट ईसे खां थाने में धारा 209 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले अर्शप्रीत पर नशा तस्करों से 5 लाख रुपये लेकर उन्हें छोड़ने के आरोप में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।

इस संबंध में कोट ईसे खां थाने के सब-इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह ने बताया कि “तत्कालीन थाना प्रभारी अर्शप्रीत कौर के खिलाफ 23 अक्टूबर 2024 को एक नशा तस्कर को छोड़ने के बदले 5 लाख रुपये की रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद से महिला पुलिस अधिकारी फरार है. उसकी जमानत अर्जी भी खारिज हो चुकी है. मामला दर्ज होने के 9 महीने बाद भी निलंबित महिला अधिकारी अदालत में पेश नहीं हुई, जिसके चलते अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।
पुलिस के अनुसार, 1 अक्टूबर 2024 को मुखबिर ने सूचना दी थी कि उसी दिन एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में कोट ईसे खां थाने की पुलिस ने स्थानीय निवासी अमरजीत सिंह को एक स्कॉर्पियो गाड़ी और 2 किलो अफीम के साथ गिरफ्तार किया था. अमरजीत के साथ उसका भाई मनप्रीत सिंह और भतीजा गुरप्रीत सिंह भी था. उन्हें मौके से 3 किलो अफीम के साथ गिरफ्तार भी किया गया था. इंस्पेक्टर अर्शप्रीत कौर ने थाने के मुंशी गुरप्रीत सिंह और बलखंडी चौकी के मुंशी राजपाल सिंह के साथ मिलकर 5 लाख रुपये लिए थे।
          कोरोना काल में सुर्खियों में आई थीं अर्शप्रीत कौरनिलंबित महिला SHO अर्शप्रीत कौर कोरोना संकट के दौरान भी सुर्खियों में आई थीं. वह लुधियाना के बस्ती जोधेवाल थाने और डिवीजन नंबर 2 में SHO के पद पर कार्यरत रही हैं. कोविड के दौरान उनकी तैनाती लुधियाना में थी. वह कोविड के दौरान लोगों की सेवा में लगी रहीं और लोगों को कोविड से लड़ने के लिए प्रेरित कर रही थीं. इस दौरान वह खुद कोरोना से संक्रमित हो गईं. कुछ समय तक आइसोलेशन में रहीं और ठीक हो गईं. जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली तो उन पर फूलों की वर्षा की गई. इस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुद वीडियो कॉल पर अर्शप्रीत से बात की थी।

गौरतलब है कि इंस्पेक्टर अर्शप्रीत कौर लुधियाना की रहने वाली हैं और उन्होंने लुधियाना से ही उच्च शिक्षा हासिल की है. पुलिस की ड्यूटी करने के साथ-साथ वह पारिवारिक जिम्मेदारी भी निभा रही हैं, यानी वह शादीशुदा हैं और उनका एक बच्चा भी है. अर्शप्रीत के पिता भी पंजाब पुलिस में तैनात थे और कई अफसरों के साथ काम कर चुके हैं. इसी वजह से अर्शप्रीत का अलग अंदाज देखने को मिलता रहा है।

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