माता श्री नैना देवी मंदिर के लिए बनेगा बड़ा मास्टर प्लान : मुख्यमंत्री सुक्खू

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एएम नाथ । शिमला, 24 मार्च : हिमाचल प्रदेश सरकार ने श्री नैना देवी मंदिर के लिए जल्द एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख मंदिरों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है और श्री नैना देवी मंदिर के लिए एक साल के भीतर विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।

विधानसभा में मंगलवार को विधायक रणधीर शर्मा के सवाल पर हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने इस साल के बजट में श्री नैना देवी मंदिर और ज्वालामुखी मंदिर के लिए अलग-अलग 25-25 लाख रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लिफ्ट लगाने का भी प्रावधान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि श्री नैना देवी मंदिर परिसर में दुकानों के लिए उचित स्थान तय किया जाएगा और श्रद्धालुओं के लिए वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी इंतजाम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगले छह महीने के भीतर वास्तुकार से मास्टर प्लान तैयार करवाया जाएगा। इसके अलावा मंदिर न्यास समिति की बैठकों में स्थानीय विधायकों को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया जाएगा, ताकि वे भी फैसलों में भागीदारी कर सकें।

इससे पहले मूल सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि श्री नैना देवी मंदिर में लिफ्ट निर्माण का काम पिछली भाजपा सरकार के समय शुरू किया गया था। उस समय इस परियोजना के लिए लगभग 6 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिनमें से 3 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए गए थे और काम शुरू हो गया था। हालांकि बाद में नए मंदिर न्यास के गठन के बाद प्रस्ताव पारित कर इस काम को रोक दिया गया।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा कराए गए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मंदिर क्षेत्र को अत्यधिक संवेदनशील और खतरनाक क्षेत्र बताया गया है। रिपोर्ट में इस इलाके में भारी निर्माण कार्य और बड़ी मशीनरी के इस्तेमाल से बचने की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित स्थल संकरा होने के कारण वहां ज्यादा भीड़ इकट्ठा होने की आशंका थी, जो सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता था। इसलिए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर न्यास ने सर्वसम्मति से तय किया कि प्रस्तावित स्थान पर लिफ्ट निर्माण की बजाय कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की जाए।

उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं और मंदिर न्यास की ओर से प्रस्ताव आता है, तो सरकार लिफ्ट निर्माण का काम आगे बढ़ाने को तैयार है।

 

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