मैहला में ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन … आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर काम में निपूर्ण : बीडीओ बशीर खान

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कार्यशाला का वास्तविक महत्व तभी सिद्ध होगा, जब आंगनबाड़ी केंद्रों में व्यवहारिक रूप से लागू होगा : सीडीपीओ राजेश राय

एएम नाथ। चम्बा :  बाल विकास परियोजना मैहला के अंतर्गत “पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत तीन दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम के तीसरे बैच का समापन बीडीओ मैहला श्री बशीर खान की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
बीडीओ बशीर खान ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर काम में निपूर्ण है। चाहे वो बीपीएल सर्वे का काम हो या बीएलओ का या अन्य कोई भी काम हो वे हर हाल में पूरा करती हैं। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आप ने जो इस दौरान सीखा है उसको धरातल पर ले जाएंगी। कार्यशाला का आयोजन 1 से 3 जनवरी तक किया गया, जिसमें 100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
समापन अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) मैहला श्री राजेश राय ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए कहा कि इस कार्यशाला का वास्तविक महत्व तभी सिद्ध होगा, जब प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को आंगनबाड़ी केंद्रों में व्यवहारिक रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय कार्यशाला के प्रथम दिन पढ़ाई, दूसरे दिन पोषण तथा अंतिम दिन पोषण एवं पढ़ाई विषयों पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण मिशन पोषण 2.0 के लक्ष्य की प्राप्ति तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं की गुणवता में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अंतिम दिन कुल चार मास्टर ट्रेनरों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान पर्यवेक्षक एवं मास्टर ट्रेनर नीलम कुमारी ने दिव्यांग बच्चों की स्क्रीनिंग, समावेशन एवं रेफरल प्रक्रिया की जानकारी दी। पर्यवेक्षक रेखा देवी ने जन्म से तीन वर्ष (0–3) तक के बच्चों के लिए नवचेतना एवं गतिविधि उत्तेजना कैलेंडर पर विस्तृत जानकारी साझा की। वहीं पर्यवेक्षक रजनी देवी ने बच्चों के मूल्यांकन तथा सीखने के परिणामों पर प्रकाश डाला। अंत में पर्यवेक्षक विद्या देवी ने आंगनबाड़ी केंद्रों को लर्निंग सेंटर के रूप में विकसित करने हेतु अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं से अवगत कराया।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल-केंद्रित, व्यवहारिक एवं रोचक शिक्षण तकनीकों से सशक्त किया गया, जिससे प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
“पोषण भी, पढ़ाई भी” तीन दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन संवाद एवं संचार विषय पर एक छोटी गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसमें 12 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्वयं आगे बढ़कर भाग लिया।
इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को कार्यालय द्वारा संप्रेषित संदेश को लाभार्थियों तक सही एवं उचित तरीके से पहुँचाने हेतु सक्षम बनाना था। ब्लाक पोषण समन्वयक संजय ने
गतिविधि के दौरान सम्मिलित समस्त कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया तथा उन्हें सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।

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