राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खलग में विशेष संवाद कार्यक्रम : DC , SP, ADM और SDM ने विद्यार्थियों से किया संवाद

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कभी हारने की चिंता न करें बच्चे, सोच बड़ी रखें: DC अनुपम कश्यप

एएम नाथ।  शिमला। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे जीवन में कभी हार से न डरें और अपने सपनों को हमेशा बड़ा रखें। उन्होंने कहा कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि अपनी कमियों को पहचानकर बेहतर तैयारी करने का अवसर है। विद्यार्थियों को अपने जीवन का नियंत्रण स्वयं अपने हाथ में रखने तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए उन्होंने नशे और गलत संगति से पूरी तरह दूर रहने की भी अपील की।

उपायुक्त अनुपम कश्यप सोमवार को राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खलग में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों से बातचीत कर रहे थे। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी, एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा और डीएसपी गुलशन नेगी ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।May be an image of one or more people

माता-पिता के त्याग और मेहनत को समझें बच्चे

उपायुक्त ने कहा कि बच्चों के जीवन में माता-पिता, भाई-बहन और दादा-दादी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुबह समय पर तैयार कर स्कूल भेजना भी माता-पिता के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज यदि वे अनुशासित, आत्मविश्वासी और बेहतर तरीके से आगे बढ़ रहे हैं, तो इसके पीछे उनके परिवार की मेहनत और त्याग भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अक्सर बच्चे माता-पिता और परिजनों के प्रयासों को सामान्य समझ लेते हैं, जबकि उनके पीछे काफी मेहनत, चिंता और स्नेह होता है।

उन्होंने विशेष रूप से मां की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि मां बच्चों के लिए भोजन तैयार करती है, उनकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखती है और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करती है। इसलिए बच्चों को छोटी-छोटी कमियां निकालने के बजाय मां और परिवार के प्रयासों का सम्मान करना चाहिए।

अपने जीवन का ‘स्टीयरिंग’ खुद संभालें

उपायुक्त ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “आपकी लाइफ का स्टीयरिंग आपके अपने हाथ में होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षक और मार्गदर्शक बच्चों को सही दिशा दिखा सकते हैं तथा सही और गलत की पहचान करना सिखा सकते हैं, लेकिन उनके जीवन की दिशा तय करने का अंतिम अधिकार स्वयं बच्चों के हाथ में है।

उन्होंने कहा कि जब बच्चों को यह समझ आ जाता है कि उनके लिए क्या सही और क्या गलत है, तो वे किसी दूसरे व्यक्ति को अपने जीवन को नियंत्रित करने की अनुमति नहीं देते। उन्होंने कहा कि जीवन का नियंत्रण अपने हाथ में रखने वाला बच्चा गलत रास्ते पर जाने से स्वयं को रोक सकता है।

कमजोर समय में जीवन की अनमोलता को याद रखें

उपायुक्त ने कहा कि जीवन में कभी ऐसी कमजोर घड़ी आए जब कोई बच्चा परेशान या स्वयं को कमजोर महसूस करे, तो उसे यह जरूर याद रखना चाहिए कि मिला हुआ जीवन बेहद अनमोल है और यह दोबारा नहीं मिलता।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि छोटी-छोटी परेशानियों को अपने ऊपर हावी न होने दें। स्वस्थ शरीर, नियमित व्यायाम, खेलकूद, सकारात्मक गतिविधियों और अच्छी पुस्तकों के अध्ययन से जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।

उन्होंने बच्चों से अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान पर गर्व करने तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

नशे को जीवन में जगह न दें

उपायुक्त ने नशे को समाज और युवाओं के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए बच्चों से इससे पूरी तरह दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे से जुड़े किसी भी व्यक्ति या गतिविधि से दूरी बनाए रखनी चाहिए और गलत संगति से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी अपने जीवन में नशे के लिए कोई जगह नहीं रखने का दृढ़ संकल्प लें और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें तो वे कई गंभीर समस्याओं से बच सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जब लक्ष्य बड़ा होगा तो उसे हासिल करने के लिए तैयारी भी उसी स्तर की करनी होगी।

असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखें

उपायुक्त ने कहा कि जीवन में असफलताएं आना स्वाभाविक है, लेकिन असफलता को अंत नहीं समझना चाहिए। असफलता यह बताती है कि हमारी मेहनत और तैयारी में कहां सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे असफलताओं से सीखें, अपनी कमियों को पहचानें और पहले से अधिक मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें।

नशा और मोबाइल बच्चों के सामने बड़ी चुनौतियां: गौरव सिंह

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि आज बच्चों के सामने नशा और मोबाइल का अत्यधिक उपयोग दो बड़ी चुनौतियां बनकर सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि नशा युवाओं को गलत दिशा में ले जा सकता है, जबकि मोबाइल के अत्यधिक एवं अनियंत्रित उपयोग से बच्चों में पढ़ाई से ध्यान भटकने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

एसएसपी ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि उन्हें अपने आसपास नशे या किसी गलत गतिविधि से जुड़ी कोई जानकारी मिलती है तो उसे अपने तक सीमित न रखें। इसकी जानकारी प्राचार्य, शिक्षक या कक्षा अध्यापक को दें। आवश्यकता होने पर संबंधित अधिकारियों तक भी सूचना पहुंचाएं।

उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता के लिए हमेशा तत्पर है। इसलिए किसी समस्या को छिपाने के बजाय सही समय पर सही व्यक्ति तक जानकारी पहुंचाना उसके समाधान की दिशा में पहला कदम है।

उन्होंने सभी बच्चों से नशा न करने और नशे से जुड़े वातावरण एवं गलत संगति से दूर रहने का दृढ़ संकल्प लेने का आह्वान किया।

सपने देखें और उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत करें: ज्ञान सागर नेगी

अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में जो भी बनना चाहते हैं, उसके बारे में सपने देखें और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करें।

उन्होंने कहा कि यदि हम अपने भविष्य के बारे में सपने ही नहीं देखेंगे तो जीवन में अपने लक्ष्य और संकल्प निर्धारित करना कठिन होगा।

सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध: मंजीत शर्मा

एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा ने कहा कि अब सरकारी स्कूलों में भी निजी स्कूलों की तरह बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। सरकारी स्कूलों में सीबीएसई बोर्ड की सुविधा के साथ-साथ आधारभूत ढांचे को भी मजबूत किया गया है।

उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ-साथ अपने सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान देने का आह्वान किया।

गलत के खिलाफ आवाज उठाएं बच्चे: डीएसपी गुलशन नेगी

डीएसपी गुलशन नेगी ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि उनके साथ या उनके आसपास कोई गलत घटना होती है तो उसे सहन करने के बजाय उसका विरोध करना चाहिए और तुरंत इसकी जानकारी अपने माता-पिता या शिक्षकों को देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत कार्य के खिलाफ मौन रहना सीख लेता है तो सामने वाला उसके मौन का फायदा उठा सकता है। उन्होंने बच्चों, विशेषकर छात्राओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने और किसी भी समस्या को छिपाने के बजाय तुरंत साझा करने की सलाह दी।

इस अवसर पर स्कूल के प्रधानाचार्य कुलभूषण शर्मा, स्कूल स्टाफ तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

स्टेट मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को मिलेंगे 50 हजार रुपये

विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त अनुपम कश्यप ने विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन की घोषणा भी की।

उन्होंने कहा कि मार्च 2027 में होने वाली दसवीं और जमा दो की वार्षिक परीक्षाओं में स्टेट मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 50 हजार रुपये की मेधावी प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्त दोनों बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को क्रमशः 25 हजार, 20 हजार और 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

उपायुक्त ने कहा कि यह प्रोत्साहन राशि वह अपने वेतन से विद्यार्थियों को प्रदान करेंगे। उन्होंने बताया कि मशोबरा स्कूल के विद्यार्थियों को भी इसी प्रकार प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है।

स्कूल के विस्तार और लाइब्रेरी के लिए भी सहयोग

उपायुक्त ने स्कूल परिसर के विस्तार के लिए खंड विकास कार्यालय की ओर से 5 लाख रुपये उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया।

उन्होंने स्कूल की लाइब्रेरी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित नई पुस्तकों की खरीद हेतु बजट उपलब्ध करवाने की बात भी कही।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन, नशामुक्ति, सकारात्मक सोच और लक्ष्य निर्धारण के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें मेहनत एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

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