राजनीति के नाम पर व्यवस्था-मर्यादा सब तार-तार : जयराम ठाकुर

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यूपीए सरकार के समय हुआ हिमाचल से भेदभाव, मोदी सरकार ने दी विकास को रफ़्तार

वित्त आयोग के समक्ष तर्कपूर्ण पक्ष रखने के बजाय सिर्फ राजनीति करती रही सुक्खू सरकार

लोगों को आपदा में तिरपाल न दे पाने वाले पूर्व सरकार के काम की क्या बराबरी करेंगे

तीन साल में सत्ता में रहते हुए क्या मुख्यमंत्री को वित्तीय हालात की नहीं थी जानकारी

एएम नाथ। शिमला : अपने विधानसभा कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि इस सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सुक्खू सरकार ने सभी व्यवस्थाओं और मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है। बजट सत्र में ही बजट का पता नहीं है। कब क्या होना हैं? कुछ भी पता नहीं चल रहा है? हमेशा से यह परंपरा रही है कि राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव होता है, चर्चा होती है। लेकिन सब कुछ अपने-अपने हिसाब से चल रहा है। ऐसी स्थिति प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं आई थी कि सब कुछ अस्त-व्यस्त हो चुका है। सारा दोष केंद्र सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सरकारों पर थोपना चाहते हैं। जो की सही नहीं है। सरकार जनहित के बजाय पूरे यकीन के साथ झूठ बोलने और उसी झूठ पर टिके रहने में यकीन करती है।
शिमला से जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि जब से देश में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है तब से हिमाचल प्रदेश को जितना सहयोग मिला है वह हिमाचल के इतिहास में कभी नहीं हुआ। यूपीए के दो कार्यकाल में हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में मात्र 18 हज़ार करोड़ रुपए मिले थे। जबकि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में ही 78 हज़ार करोड़ रुपए मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि हिमाचल सर्वाधिक आरडीजी पाने वाले राज्यों में शामिल रहा। पीएम बनते ही नरेंद्र मोदी ने हिमाचल को विशेष राज्य का दर्जा दिया। केंद्र प्रायोजित स्कीम में हिमाचल के अंशदान को घटाकर 10% किया। जिसे मनमोहन सिंह की सरकार ने छीन लिया था। रेलवे से लेकर, नेशनल हाईवे, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत सभी क्षेत्रों में हिमाचल को भरपूर सहयोग मिल रहा है बस राज्य सरकार राजनीति कर रही है। केंद्र सरकार की 191 योजनाएं देश में चल रही है। जिसका भरपूर लाभ राजनीति से उठकर हिमाचल ले सकता है। ग्रांट इन ऐड के तौर पर मोदी सरकार में 1.42 लाख करोड़ और टैक्स शेयर के रूप में 60 हज़ार करोड़ रुपए मिले। यह धनराशि यूपीए के कार्यकाल से कई गुना अधिक है। इसलिए केंद्र सरकार पर सहयोग न करने का आरोप लगाना बेहद हास्यास्पद लगता है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार ने वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती और तर्कपूर्ण रखने के बजाय सिर्फ राजनीति करती रही। हर जगह राजनीति से नहीं की जा सकती है। वित्त आयोग के समक्ष अपनी बात रखने के बजाय केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ ही बयानबाजी में लगे रहे। जिन केंद्रीय फोरम पर हिमाचल का पक्ष रखना चाहिए, वहाँ राजनीति करके प्रदेश का ही नुक़सान किया जा रहा है। नीति आयोग की बैठक में भी सुक्खू सरकार ने राजनीति को हिमाचल के हितों के ऊपर रखा। जिसकी क़ीमत प्रदेश को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने 15 वें वित्त आयोग के समय का हवाला दिया। उस समय हमने हिमाचल का ज़ोरदार पक्ष रखा। प्रधानमंत्री से भी मिले। दिल्ली तक गए। अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की। अपनी स्थिति बताई। कोविड का हवाला दिया। जिसके बाद हम हिमाचल के लिए बेहतर कर पाए। लेकिन यहाँ पूरी व्यवस्था ही खज्जल है। एक तरफ़ सरकार कहती है माली हालत ख़राब है दूसरी तरफ़ मित्रों की नित नई नियुक्तियाँ की जाती है। इंटरनेट भत्ता देने की चिट्ठी निकाली जाती है। वित्त सचिव कहते हैं कि सुविधाएं रोकनी पड़ेगी। सीएम कहते हैं सब ठीक हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि यह सरकार तीन साल में 45 हज़ार करोड़ के लोन पर खड़ी है। हमारी सरकार का लोन पेआउट 95 प्रतिशत था। पहले दो साल का लोन पे आउट 130 प्रतिशत था। हमारी सरकार ने कोविड का दौर झेला। जो सरकार आपदा के समय प्रभावितों को तिरपाल भी नहीं दे पाई वह सरकार कोविड जैसी महामारी से उपजी भयावह परिस्थिति की कल्पना भी नहीं कर सकती हैं। प्रदेश के लोगों के लिए नई योजनाएं बनाने के बजाय बंद करने में ही सारा ध्यान लगा दिया। हजारों की संख्या में संस्थान बंद करने और प्रदेश के 75 लाख लोगों को हर जगह से परेशान करने पर लगी रही। यह सरकार मरीजों को इलाज तक नहीं दे पा रही है। पूरी तरह से अशक्त लोगों को सहारा पेंशन तक नहीं दे पा रही है। तीन साल से हिमाचल को 2027 में आत्म निर्भर और 2032 में सबसे समृद्ध बनाने की बात हो रही थी। फिर एक दिन आकर कहते हैं कि हम हिम केयर और शगुन का पैसा भी नहीं देंगे। क्या तीन साल तक सत्ता में रहने के बाद उन्हें प्रदेश के आर्थिक हालात की जानकारी नहीं थी। इस तरह से सरकार चलाकर प्रदेश का भला नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ओछी राजनीति छोड़े और प्रदेश के विकास के लिए एक नेता की तरह काम करें।

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