राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी का दावा : एसवाईएल की जगह वाईएसएल बनाने का सुझाव …‘हम पानी के रखवाले, वे शर्म से पानी-पानी हो रहे’: भगवंत मान

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चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पानी के बंटवारे, राजस्थान से रॉयल्टी की मांग, एसवाईएल नहर और करतारपुर कॉरिडोर सहित कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। राजस्थान से पानी की रॉयल्टी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पंजाब अपने पानी का रखवाला है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1961 से 2025 तक पानी के इस्तेमाल के बदले राजस्थान से पंजाब को 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिलनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के विधायक सदन से चले गए और पानी से संबंधित प्रस्ताव पारित करने का रास्ता साफ हो गया। उन्होंने कहा, “हम पानी के रखवाले हैं और रखवाले बने रहेंगे।” मान ने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ ठोस मुद्दे नहीं हैं और वह सदन में बहस का सामना करने से बच रहा है।

‘राजस्थान पानी लेकर आगे बेचता है, पंजाब को रॉयल्टी मिलनी चाहिए’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान वर्ष 1960 तक पंजाब को पानी की रॉयल्टी देता रहा है, लेकिन अब पंजाब से पानी लेकर उसका इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ हासिल कर रहा है। उन्होंने इसे मुफ्त में कच्चा माल लेकर तैयार उत्पाद बेचने जैसा बताया।

मान ने सवाल उठाया कि जब सतलुज, रावी और ब्यास नदियां राजस्थान से होकर नहीं गुजरतीं, तो पंजाब के पानी के इस्तेमाल के बदले राज्य को उचित भुगतान क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब पानी की हर बूंद के लिए आवाज उठाएगा और जरूरत पड़ने पर अदालत से लेकर सड़कों तक संघर्ष किया जाएगा।

एसवाईएल की जगह वाईएसएल बनाने का सुझाव

पानी के बंटवारे पर मुख्यमंत्री ने एसवाईएल नहर के विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में एसवाईएल की जगह वाईएसएल यानी यमुना-सतलुज लिंक का सुझाव दिया था। उनके प्रस्ताव के अनुसार, इससे हरियाणा को पानी उपलब्ध करवाया जा सकता है और बचा हुआ पानी सतलुज में डाला जा सकता है।

मान ने कहा कि पंजाब में सतलुज नदी में पानी की उपलब्धता कम हो गई है। ऐसे में केवल नहर बनाने की बात करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पहले पानी की उपलब्धता पर विचार करना जरूरी है। उन्होंने 1958 के समझौते का हवाला देते हुए भी सवाल उठाया कि जब पर्याप्त पानी नहीं है, तो नहर निर्माण का क्या लाभ होगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल किया कि यमुना के पानी से संबंधित बैठकों में पंजाब को क्यों नहीं बुलाया जाता, जबकि रावी और ब्यास के पानी के बंटवारे पर पंजाब से जवाब मांगा जाता है। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा के पुनर्गठन से पहले दोनों राज्य एक ही प्रदेश का हिस्सा थे और उस समय यमुना के पानी में पंजाब की हिस्सेदारी थी।

करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने करतारपुर कॉरिडोर को दोबारा खोलने की पैरवी करते हुए कहा कि पहले इसके माध्यम से श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते थे और उस दौरान किसी बड़ी समस्या की जानकारी सामने नहीं आई थी। उन्होंने कहा कि दोनों तरफ के लोगों के बीच प्रेम और सद्भाव है तथा कॉरिडोर खोलने के लिए पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से संपर्क किया है।

मान ने कहा कि तनाव जम्मू-कश्मीर में होता है, लेकिन इसका असर पंजाब के सीमावर्ती गांवों पर पड़ता है और कई बार लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ते हैं। उन्होंने 1947 के विभाजन के दौरान हुई जनहानि का जिक्र करते हुए कहा कि लोग आज भी करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए अरदास करते हैं। उन्होंने खेलों में भी राजनीति आने पर चिंता जताई।

सरकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का ऐलान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार की योजनाएं जनहित में हैं। बिजली से जुड़ी योजना और मावां-धीयां योजना सहित अन्य योजनाओं को लेकर सरकार लोगों के बीच जाएगी और अपना एजेंडा जनता के सामने रखेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सकारात्मक तरीके से लोगों तक पहुंचेगी और अपनी योजनाओं के लाभों के बारे में जानकारी देगी।

भूजल की स्थिति पर भी उठाया सवाल

मान ने पंजाब में गिरते भूजल स्तर का जिक्र करते हुए कहा कि पहले ट्यूबवेल लगने के समय 20 से 25 फुट की गहराई पर पानी मिल जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने भूजल के अत्यधिक दोहन और पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई। इस विषय पर केंद्र सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने पंजाब में भूमिगत जल के इस्तेमाल से संबंधित आंकड़ों पर भी चर्चा की।

मुख्यमंत्री के इन बयानों के साथ विधानसभा के विशेष सत्र में पानी के बंटवारे और पंजाब के जल अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। राजस्थान से रॉयल्टी की मांग, एसवाईएल विवाद और यमुना के पानी में हिस्सेदारी को लेकर अब केंद्र तथा संबंधित राज्यों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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