राष्ट्रीय लोक अदालत में 646 केसों का मौके पर हुआ निपटारा , 1712 केसों की हुई सुनवाई, 7,91,57,923 रुपए के अवार्ड पास

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– वर्षों से लंबित पड़े वैवाहिक झगड़े, डिवोर्स पटीशन, खर्चे का निपटारा व क्रिमिनल केस आपसी रजामंदी से निपटाए
होशियारपु:
जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी होशियारपुर की ओर से पंजाब स्टेट कानूनी सेवाएं अथारिटी के निर्देशों पर आज जिले में इस वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कुल 1712 केसों की सुनवाई करते हुए 646 केसों का मौके पर निपटारा करने के साथ-साथ 7,91,57,923 रुपए के अवार्ड पास किए गए। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में 138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट(पेंडिंग व प्री-लिटिगेशन बैंक रिकवरी मामले व लेबर डिस्पयूट मामले) एम.ए.सी.टी मामले , बिजली व पानी बिल(एक्सक्लयूडिंग नान-कंपाउंडेबल), वैवाहिक विवाद, ट्रैफिक चालान व अन्य सिविल मामलों के केस रखे गए।
जिला एवं सत्र न्यायधीश -कम-चेयरमैन जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी अमरजोत भट्टी के नेतृत्व में लगाई गई लोक अदालत के बारे में जानकारी देते हुए सी.जे.एम-कम-सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी अपराजिता जोशी ने बताया कि इस लोक अदालत में होशियारपुर में 10 बैंच व सब डिविजन दसूहा, मुकेरियां व गढ़शंकर में 3-3 बैंचों का गठन किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश पुनीत मोहन शर्मा की ओर से रजामंदी से दस वर्ष पुराना केस नीरज बनाम संदीप संदू धारा 125 सी.आर.पी.सी जो कि दस वर्ष से लंबित था का फैसला किया गया। एक अन्य केस अरविंद सिद्धू बनाम कमलजीत धारा डिवोर्स पटीशन में माननीय जज ने आपसी राजीनामे से लडक़े व लडक़ी का झगड़ा सुलझाया व इक_े खुशी-खुशी उनको घर भेजा। उपरोक्ता के अलावा एक केस परमजीत कौर बनाम गगनदीप धारा 13 हिंदू मैरिज एक्ट का केस 7 वर्ष से लंबित था, जिसका राजीनामा के माध्यम से दोनों पक्षों का समझौता करवाया गया। इसके अलावा एक अन्य केस शविता शर्मा बनाम रवि कुमार खर्चे का निपटारा, दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी से सैटल किया।
इसी तरह दसूहा में जज परमिंदर कौर बैंस की अदालत में 15 वर्ष से लंबित क्रिमिनल केस संजय जैन बनाम संजीव कुमार, मारपीट के मामले का निपटारा भी आज की राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी राजीनामे से हुआ। सचिव जिला कानूनी सेवाएं अथारिटी अपराजिता जोशी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक केस लोक अदालत में लगाए जाएं क्योंकि इससे समय व धन दोनों की बचत होती है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के फैसले को दीवानी डिकरी की मान्यता प्राप्त होती है व लोक अदालत में केस का फैसला अंतिम होता है व इसकी कोई अपील नहीं होती। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में फैसला होने के बाद केस में लगी सारी कोर्ट फीस वापिस मिल जाती है। इस लिए लोग अधिक से अधिक केसों का निपटारा इन लोक अदालतों के माध्यम से करवा कर लाभ प्राप्त करें।

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