विजिलेंस और एसीबी को आरटीआई से बाहर रखकर क्या छुपाना चाहते मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर

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मुख्यमंत्री को अपनी ही सरकार के कानून में नहीं है भरोसा, पलट रहे आलाकमान के निर्णय

कहा, न खाता न बही जो सुक्खू जी कहें वही सही से नहीं चलेगा प्रदेश

एएम नाथ। धर्मशाला : कांगड़ा प्रवास पर पहुंचे नेता पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार द्वारा विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर करने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, अलोकतांत्रिक और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। जिस पार्टी के नेता पूरे देश में संविधान की किताब लेकर चल रहे हैं वही पार्टी सत्ता में आने के बाद संविधान, कायदा-कानून और लोकलाज की धज्जियां उड़ा रही है। सुक्खू सरकार के इस फैसले हसे यह साफ़ है कि वह पारदर्शिता से डरती है और प्रदेश में फैलते भ्रष्टाचार को छिपाने का प्रयास कर रही है। उससे भी हैरानी की बात यह है कि व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार अपने ही आलाकमान द्वारा बनाए गए कानून के ख़िलाफ़ खड़ी है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून की धारा 24 स्पष्ट रूप से कहती है कि केवल वे एजेंसियां इस कानून से बाहर हो सकती हैं जो इंटेलिजेंस और सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील गतिविधियों में संलग्न हों। यदि उनमें भी भ्रष्टाचार और मानवाधिकार हनन की शिकायत हो तो उसकी जानकारी देनी पड़ेगी। जबकि विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो का काम ही भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना है। ऐसे में इसे आरटीआई के दायरे से बाहर करने का कोई संवैधानिक या नैतिक आधार नहीं है। राज्यों की विधान सभा और संसद भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को आरटीआई से बाहर रखने का क़ानून नहीं बना सकते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि ऐसा बड़ा निर्णय बिना विधानसभा में लाए और बिना विधायी प्रक्रिया पूरी किए लेने की कोशिश की जा रही है। आरटीआई कानून की धारा 24 के सेक्शन 5 के अनुसार किसी भी एजेंसी को इस सूची में जोड़ने के लिए विधानसभा से विधिवत पारित कराकर गजट नोटिफिकेशन जारी करना अनिवार्य है। लेकिन सुक्खू सरकार “खाता न बही, जो सुक्खू साहब कहें वही सही” की तर्ज पर सरकार चलाना चाहती है। लोकतंत्र में इस प्रकार की मनमानी कभी स्वीकार नहीं की जा सकती। यह कदम सीधे-सीधे पारदर्शिता को खत्म करने और भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का प्रयास है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर विजिलेंस में ऐसी कौन सी जांच चल रही है, जिसे प्रदेश की जनता से छिपाने की जरूरत महसूस हो रही है। जिस जांच का उद्देश्य भ्रष्टाचार को उजागर करना और दोषियों को सजा दिलाना है, उसे गोपनीय बनाने का क्या औचित्य है? इससे साफ़ संकेत मिलता है कि सरकार अपने ही मंत्रियों और नेताओं से जुड़े मामलों को दबाने की तैयारी कर रही है। हाल ही में एक “अत्यंत वरिष्ठ मंत्री” के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा विजिलेंस जांच के आदेश दिया जो मामला कांग्रेस के आलाकमान तक गया। इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सरकार के भीतर किस प्रकार के दबाव और खींचतान चल रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री विजिलेंस की जांच को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर अपने मंत्रियों और विधायकों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के लोग जानना चाहते हैं कि आखिर सरकार को आरटीआई से इतनी परेशानी क्यों है। आरटीआई की मूल भावना ही यह है कि भ्रष्टाचार और मानवाधिकार हनन से जुड़ी सूचनाएं जनता के सामने आएं। यदि सरकार पारदर्शी है तो उसे इस कानून से डरने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री को तुरंत इस फैसले को वापस लेना चाहिए और प्रदेशवासियों के सामने पूरी सच्चाई रखनी चाहिए।
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केंद्र से मिली ₹288.39 करोड़ की अतिरिक्त आपदा सहायता पर जताया आभार

​नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹288.39 करोड़ की अतिरिक्त सहायता राशि स्वीकृत करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह राशि प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास में संजीवनी का काम करेगी। साथ ही, उन्होंने प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि इस धनराशि का उपयोग केवल और केवल आपदा प्रभावितों की मदद के लिए ही सुनिश्चित किया जाए।
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​धर्मशाला आगमन पर उपराष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया

​देवभूमि हिमाचल प्रदेश के अपने प्रथम प्रवास पर धर्मशाला पहुंचे उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हार्दिक अभिनंदन और स्वागत किया। इसके बाद वे केंद्रीय विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति का आगमन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और उनके मार्गदर्शन से केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के छात्र छात्राओं और फैकल्टी को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने उनके यहां संबोधन को अध्ययनरत छात्रों के लिए बहुत प्रेरणादायक बताया।

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