विधायकों की गाड़ियों के चालान का मामला मामले को सदन में उठा : नियमों के विपरीत अधिकारी नेम-प्लेट, फ्लैशर लाइट लगाकर घूमते हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती

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शिमला : पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत फतेहपुर से कांग्रेस विधायक भवानी सिंह पठानिया ने विधानसभा बजट सत्र में विधायकों की गाड़ियों के चालान का मामला मामले को सदन में उठाया। कुछ दिन पहले उनकी गाड़ी का शिमला के बालूगंज में चालान हुआ। विधायक भवानी सिंह पठानिया का कहना है कि चालान करने वाले पुलिस अधिकारी के वाहन पर डेजिगनेशन की नेम-प्लेट लगी थी, जिसके लिए वह खुद अधिकृत नहीं था। उनके उठाए इस मुद्दे का कांग्रेस-भाजपा दोनों दलों के सदस्यों ने भी समर्थन किया और अपना अपना-अपना दर्द सदन में रखा। सदस्यों ने कहा कि खुद पुलिस जवान और अधिकारी कानून का उल्लंघन करते हैं। नियमों के विपरीत नेम-प्लेट, फ्लैशर लाइट लगाकर घूमते हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कुछ दिन पहले कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार का भी शिमला के उप नगर संजौली में चालान हुआ। उधर, BJP विधायक प्रकाश राणा का भी जोगेंद्रनगर में चालान हुआ है।
इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि विधायकों की गरिमा को बचाए रखने के लिए जल्द सीनियर विधायक की कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी विधायकों का मान-सम्मान बना रहे, इसे लेकर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके लिए हाईकोर्ट के जज से भी बात की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी की अपनी गरिमा है। विधायक कड़ी मेहनत के बाद चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचता हैं, उनका मान-सम्मान जरूरी है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जिस अधिकारी ने विधायक की गाड़ी का चालान काटा है, उससे भी बात की जाएगी। पूछा जाएगा कि ऐसा क्यों किया। उन्होंने कहा कि फ्लैग कोड ऑफ इंडिया में कुछ डिग्नेटरी को झंडा लगाने की इजाजत है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष शामिल है। नेशनल फ्लैग के अलावा दूसरे अन्य झंडा देने की पावर सरकार के पास है और सरकार जल्द इस पर विचार करेगी।
धिकारी चाहते हैं विधायक उन्हें नमस्ते करें :
विधायक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि सदन में विधायकों को प्रोटोकॉल बताया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी चाहते हैं विधायक उन्हें नमस्ते करें, जबकि प्रोटोकॉल में विधायक मुख्य सचिव से भी ऊपर होता है।
विधायकों का भी सम्मान होना चाहिए:
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि जब कैबिनेट की बैठक होती थी तो अधिकारी हाईकोर्ट की फाइलों को सबसे पहले लेकर पहुंचते थे। यदि वहीं आदेश मुख्यमंत्री या मंत्री की और से हो तो उस स्पीड से फाइल कभी नहीं पहुंचती। उन्होंने कहा कि उनका हमेशा ही जूडिशियरी के प्रति सम्मान रहा है। इसी तरह विधायकों का भी सम्मान होना चाहिए।

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