वेंटिलेटर पर ब्रेन-डेड पति : पत्नी ने मांगी मां बनने की इजाजत : हाई कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

by

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए एक अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह ‘ब्रेन-डेड’ यानी दिमागी तौर पर मृत घोषित किए जा चुके एक व्यक्ति के गैमीट्स (स्पर्म) को निकालकर क्रायोप्रिजर्व करे।

ताकि वह महिला भविष्य में उसी पति के बच्चे की मां बन सके। क्रायोप्रिजर्वेशन माइनस 196 डिग्री सेल्सियस या उससे कम के अत्यंत ठंडे तापमान पर लिक्विड नाइट्रोजन का इस्तेमाल करके स्पर्म, कोशिकाओं, ऊतकों या भ्रूण जैसे जैविक नमूनों को संरक्षित करने की तकनीक है। इस फैसले से भविष्य में पत्नी के लिए सहायक प्रजनन के जरिए मां बनने का रास्ता खुल सकता है।

याचिका और कोर्ट का आदेश :  यह याचिका ब्रेन-डेड व्यक्ति की पत्नी द्वारा दायर की गई थी। जस्टिस एम.बी. स्नेहलता ने मामले की सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। कोझिकोड स्थित ‘बेबी मेमोरियल अस्पताल’ में पति का इलाज चल रहा है। कोर्ट ने अस्पताल को निर्देश दिया कि वह किसी मान्यता प्राप्त असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) क्लिनिक के माध्यम से पति के गैमीट्स (स्पर्म) निकालने और उन्हें सुरक्षित रखने की अनुमति दे।

कोर्ट की सख्त शर्त :  अदालत ने राहत तो दी, लेकिन एक सख्त शर्त भी लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत केवल गैमीट्स निकालने और उन्हें सुरक्षित रखने (क्रायोप्रिजर्वेशन) की अनुमति है। कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना आगे की कोई भी प्रजनन प्रक्रिया या इलाज नहीं किया जा सकेगा।

पति की चिकित्सीय स्थिति :  पत्नी ने अदालत को बताया कि उनके पति को दो सप्ताह तक चिकनपॉक्स था। इसके बाद उन्हें ‘एक्सटेंसिव सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस’ (मस्तिष्क की नसों में खून का थक्का जमना) की शिकायत हुई, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। दुर्भाग्य से, इसके परिणामस्वरूप वह ब्रेन-डेड हो गए और वर्तमान में उन्हें केवल वेंटिलेटर सपोर्ट पर जीवित रखा गया है।

कानूनी अड़चन और पत्नी की दलील : एआरटी (ART) कानून की धारा 22- इस कानून के तहत, जिस व्यक्ति के स्पर्म का इस्तेमाल किया जाना है, उसकी लिखित सहमति होना अनिवार्य है। पत्नी ने दलील दी कि उनके पति की वर्तमान मेडिकल स्थिति को देखते हुए उनसे सहमति लेना पूरी तरह से असंभव है। पत्नी ने कोर्ट से गुहार लगाई कि अगर इस प्रक्रिया में देरी हुई, तो उनके पति की गंभीर स्थिति के कारण स्पर्म को सुरक्षित रखने का अवसर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा, जिससे उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। इन सभी दलीलों और मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने पत्नी को अंतरिम राहत प्रदान की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को तय की गई है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

जिला के सभी शैक्षणिक संस्थानों में शुरू होंगी चुनावी साक्षरता कार्यशालाएं

रोहित जस्वाल।  ऊना, 15 मई। ऊना जिला के सभी सरकारी एवं निजी शैक्षणिक संस्थानों स्कूल, कॉलेज, आईटीआई में चुनावी साक्षरता कार्यशाला गतिविधियां शुरू की जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत...
article-image
हिमाचल प्रदेश

जन समस्याओं का संतोषजनक समाधान प्रदेश सरकार की प्राथमिकता – संजय अवस्थी

महत्वकांक्षी राजीव गांधी स्वरोज़गार स्टार्ट-अप, हिम गंगा जैसी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का किया आग्रह अर्की  : मुख्य संसदीय सचिव (लोक निर्माण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग)...
article-image
पंजाब

सांसद तिवारी ने गांव अकालगढ़ बुर्जवाला और पपराली के लोगों को सौंपे ग्रांट के चैक : कहा विकास के लिए गांवों में तरक्की जरूरी

रोपड़: 7 सितंबर: श्री आनंदपुर साहिब से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा है कि लोकसभा क्षेत्र का सर्वपक्षीय विकास उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए फंडों की कोई कमी नहीं...
article-image
हिमाचल प्रदेश

ज़िला परिषद निर्वाचन के लिए नालागढ़ क्षेत्र से आज कुल 04 नामांकन प्राप्त

एएम नाथ।  नालागढ़  : निर्वाचन अधिकारी एवं उपमण्डलाधिकारी नालागढ़ नरेंद्र आहलूवालिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचन के अंतर्गत नालागढ़ उपमण्डल में ज़िला परिषद चुनाव के लिए दूसरे दिन की...
Translate »
error: Content is protected !!