शादी का झांसा देकर यौन शोषण के आरोपी ज्योतिषी को हाई कोर्ट से जमानत : शादी का झांसा देकर यौन शोषण के आरोपी ज्योतिषी को हाई कोर्ट से जमानत

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हिमाचल हाई कोर्ट ने कहा- जब दोनों पक्ष पहले से शादीशुदा हों और तलाक न हुआ हो, तो पहली नजर में शादी का वैध वादा मानकर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण और एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोपित ज्योतिषी विनोद कुमार को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि यदि शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों पहले से विवाहित हैं और उन्होंने अपने-अपने जीवनसाथी से कानूनी रूप से तलाक नहीं लिया है, तो ऐसी स्थिति में शादी का वादा पहली नजर में वैध कानूनी वादा नहीं माना जा सकता।

यह आदेश न्यायाधीश संदीप शर्मा ने विनोद कुमार की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए पारित किया।

2022 में ज्योतिषी के संपर्क में आई थी महिला

मामले के अनुसार, बिलासपुर जिले की 31 वर्षीय महिला ने वर्ष 2017 में मनोज कुमार नामक व्यक्ति से शादी की थी। बाद में वैवाहिक विवाद के चलते वह अपने पति से अलग रहने लगी। वर्ष 2022 में वह अपनी कुंडली दिखाने के लिए ज्योतिषी विनोद कुमार के संपर्क में आई।

महिला का आरोप था कि विनोद कुमार ने कुंडली देखने के बाद उसे अपने पति से तलाक लेने की सलाह दी। आरोप के अनुसार, उसने खुद भी अपनी पत्नी से अलग होकर महिला से शादी करने का भरोसा दिया।

महिला ने आरोप लगाया कि शादी का झांसा देकर आरोपी उसका यौन शोषण करता रहा। बाद में जब उसे आरोपी के अन्य महिलाओं से संबंधों की जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध किया। महिला के अनुसार, विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की गई।

जून 2026 में दर्ज हुई एफआईआर

महिला ने 22 जून 2026 को महिला थाना बिलासपुर में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 64 और 69 तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोप लगाए गए। आरोपी 17 अगस्त 2026 से जेल में बंद था।

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के उपलब्ध तथ्यों पर विचार किया। कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी आया कि महिला वर्ष 2022 से आरोपी के संपर्क में थी और शिकायत के अनुसार वह अपनी इच्छा से उसके साथ रह रही थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि इस अवधि के दौरान महिला की ओर से तत्काल कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई थी।

तलाक के बिना शादी का वादा कानूनी रूप से मान्य नहीं

हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों पहले से विवाहित थे तथा उन्होंने अपने-अपने जीवनसाथियों से कानूनी रूप से तलाक नहीं लिया था। ऐसे में उनके बीच शादी का वादा तत्काल कानूनी रूप से पूरा किया जा सकने वाला वादा नहीं था।

अदालत ने यह भी गौर किया कि शिकायत के अनुसार आरोपी द्वारा शादी का वादा महिला के अपने पति से तलाक लेने की शर्त से जुड़ा था।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी को नियमित जमानत प्रदान कर दी। हालांकि, जमानत मिलना आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

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