मुख्यमंत्री पद की दौड़ : दावेदार दिल्ली दरबार में हाजिरी भर अपना अपना पक्ष रखने की कवायद में जुटे

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ऊना। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव नतीजों को तिथि निकट आती जा रही है तौ कांग्रेस की और से मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नेताओं ने केंद्रीय नेताओं व पार्टी हाईकमान के दिल्ली दरबार में हाजिरी भरने के साथ साथ अपना पक्ष रखा जा रहा है। कांग्रेस की और से मुख्यमंत्री पद के आपने आप को सुखविंदर सिंह सुखी, मुकेश अग्निहोत्री, राम लाल ठाकुर, कोल सिंह ठाकुर, कर्नल धनी राम शांडिल सहित एक दर्जन नेता मजबूत दावेदार मान रहे है। सूत्री की माने अगर कांग्रेस को बहुमत मिलता है तो हाईकमान कांग्रेस में दावेदारों का क्लेश खत्म करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बीरभद सिंह के बेटे युवा चिहरे विक्रमादित्य को मुख्यमंत्री बना सकती है। क्योंकि प्रदेश की जनता में स्वीकार्य होंने के साथ साथ लंबे समय तक के लिए नेतृत्व करने की उनमें क्षमता है। लेकिन इस सभी से पहले हाईकमान चुनावों के नतीजों का इंतजार कर रही है। क्योंकि हाईकमान के पास पहुंची रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री के कुछ दावेदार हार भी सकते है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह बीते कुछ दिनों से दिल्ली में ही डटीं हुई हैं। लेकिन उन्होंने विक्रमादित्य के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर उन्हें अध्यक्ष बनने ओर बधाई दी ही। माना जा रहा है कि जल्द पार्टी नेताओं से मुलाकात कर विधानसभा चुनाव के मतदान का फीडबैक देगी। मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस की चुनाव प्रचार कमेटी के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इन सभी ने मतदान के बाद प्रदेश में बनी राजनीतिक परिस्थितियों से राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत कराया। सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ सरकाघाट से कांग्रेस प्रत्याशी पवन ठाकुर, मनाली से प्रत्याशी भुवनेश्वर गौड़, भोरंज से प्रत्याशी सुरेश कुमार भी ने मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की और अध्यक्ष को हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की बहुमत से सरकार बनने को लेकर आश्वस्त किया गया। उधर, कौल सिंह ठाकुर ने अकेले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात की और प्रदेश में अपनी सरकार बनाने का दावा करते हुए दिल्ली में कहा कि मुख्यमंत्री के लिए सेनोरियटी, मैच्योरिटी वी अनुभव को ध्यान में रखा जाए।
काफी लंबे समय हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के इर्द गिर्द ही घूमती रही है। वीरभद्र सिंह के निधन के बाद से प्रदेश कांग्रेस में कोई भी सर्वमान्य नेता नहीं बन सका है। ऐसे में मतगणना से पहले ही कांग्रेस हाईकमान के समक्ष प्रदेश के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी-अपनी लॉबिंग करने में जुट गए हैं। उधर, नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री सहित किया अन्य नेताओ की भी मल्लिकार्जुन खरगे से मिल कर अपना पक्ष रखने की बात निकल कर आ रही है। मुकेश अग्निहोत्री तेज तरार नेता माने जाते ही और उनके दिल्ली में पकड़ भी काफी मजबूत है। जिससे उनकी दावेदारी को काफी मजबूती मिलती है।
विक्रमादित्य भी मुख्यमंत्री के मजबूत दावेदार के तौर पर उभर सकते :
1983 में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद वीरभद्र सिंह का प्रदेश कांग्रेस पर दबदबा रहा था। जब भी पार्टी की सरकार बनी, वह हिमाचल के सीएम बने. 1983 के बाद यह पहला चुनाव है जब पार्टी ने वीरभद्र सिंह के निधन के कारण बिना चुनाव लड़ा. हालांकि, यह वीरभद्र सिंह का ही दबदबा था कि उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह चुनाव से पहले अध्यक्ष बनकर चुनाव में कूद पड़ीं. पार्टी ने उनके विधायक पुत्र विक्रमादित्य को दूसरी बार भी मैदान में उतारा है। वीरभद्र सिंह का आज भी प्रदेश की जनता में सम्मान है। जिसके चलते प्रदेश की जनता में विक्रमादित्य की स्वीकार्यता होंने के साथ साथ युवा होने के कारण लंबे समय तक के लिए नेतृत्व करने की उनमें क्षमता है। राहुल गांधी यहां युवा चिहरो को आगे लाना चाहते है। इसके इलावा कांग्रेस को भी युवा चेहरों की आवश्यकता ही जो लंबा समय कांगेस की मजबूती के लिए काम कर सके। कांग्रेसी हलकों का भी मानना है प्रदेश में कांग्रेस को विक्रमादित्य मजबूत नेतृत्व दे सकते है।

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