सुखाश्रय योजना में फीस न जमा करना व्यवस्था परिवर्तन का एक और शर्मनाक चेहरा : जयराम ठाकुर

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सुखाश्रय में पब्लिसिटी में करोड़ों खर्च लेकिन सुविधा के नाम पर जीरो,  सीएम की फ्लैगशिप स्कीम का हाल, लाभार्थी और संस्थान बेहाल
मनाली हत्याकांड में सामने आया सरकार और प्रशासन का संवेदनहीन चेहरा
एएम नाथ। शिमला :  शिमला से जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हर दिन सुक्खू सरकार के ’सुख की सरकार’ और ’व्यवस्था परिवर्तन’ का कोई ना कोई बेशर्म चेहरा सामने आ ही जाता है। जिससे साफ हो जाता है कि एक झूठ के बाद दूसरा झूठ और दूसरे झूठ के बाद तीसरा झूठ बोलना ही सरकार की एकमात्र ध्येय है। समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि चंबा में सुखाश्रय योजना के तरह शिक्षा ले रहे छात्रों की फीस संबंधित शैक्षिक संस्थानों को नहीं जमा की गई है। यह सुक्खू सरकार का व्यवस्था परिवर्तन का एक मॉडल है जिसके नाम पर सरकार हर दिन मंचों से गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाती है। सरकार हर दिन सुखाश्रय को लेकर बड़ी बड़ी बातें कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि ऐसे बच्चों की फीस भी सरकार जमा नहीं कर रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि जब से सुक्खू सरकार सत्ता में आई है तब से हर दिन इस योजना के नाम पर प्रचार प्रसार कर रही है। प्रदेश का ऐसा कोई कोना नहीं होगा जहां पर मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री की एक बहुत बड़ी होर्डिंग सुखाश्रय योजना का प्रचार करती हुई न दिख जाए। अगर सड़कों से गुजरो तो हर दूसरी तीसरी बस पर यही होर्डिंग नजर आती है। मुख्यमंत्री से अपनी सबसे महत्वाकांक्षी फ्लैगशिप योजना के तौर पर पूरे देश में प्रस्तुत कर रहे हैं। आए दिन समाचार पत्रों में भर–भर के फुल पेज विज्ञापन दिए गए। इस योजना के प्रचार प्रसार पर हर दो तीन महीनें में करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। सड़कों की होर्डिंग्स और पोस्टर्स लगातार बदले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस योजना का नाम अपने नाम पर रखा है। इसके बाद भी इस योजना के तहत शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों की फीस सरकार पढ़ने वाले संस्थानों को नहीं दे रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मनाली में विंटर कार्निवाल के दौरान हजारों के भीड़ के बीच एक युवक की बोतल से गला रेत कर हत्या हो जाती है। यह कानून व्यवस्था की नाकामी है। मनाली पर्यटन नगरी है और इस तरह की कानून–व्यवस्था से पर्यटन को ही नुकसान हुआ है। एक स्थानीय युवक की हजारों लोगों के बीच बर्बरता से हत्या हो जाती है और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलता रहा। यह सरकार और प्रशासन की संवेदनहीनता है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। प्रशासन का ऐसा ही चेहरा पहले भी सामने आ चुका है जब तांदी गांव में आग लगी थी और सैकड़ों लोग बेघर हो गए थे उस समय वहां का प्रशासन लोगों को राहत पहुंचाने के बजाय अन्य काम में व्यस्त रहा।
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