पिता के संघर्ष को सलाम, इरादे नेक हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं
एएम नाथ। चम्बा : यह एक बेहद गर्व और प्रेरणा देने वाला क्षण है। जब एक मनरेगा मजदूर (दिहाड़ीदार) का बेटा अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दल का जिलाध्यक्ष बनता है, तो यह न केवल उस परिवार की जीत है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल है। बात हो रही है नवनियुक्त कांग्रेस जिलाध्यक्ष चम्बा सुरजीत सिंह भरमौरी की।
बेटे के कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनने पर भरमौर निवासी पिता बलि राम का कहना है कि “मैं वह खुशनसीब हूं जिसका बेटा जिलाध्यक्ष बना”, उस तपस्या का फल है जो उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाने और इस काबिल बनाने के लिए की।
उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में आज भी एक साधारण पृष्ठभूमि का व्यक्ति अपनी काबिलियत से ऊंचे पदों तक पहुँच सकता है।
एक मनरेगा मजदूर के लिए घर चलाना ही बड़ी चुनौती होती है, ऐसे में अपने बेटे को राजनीति और समाजसेवा के इस स्तर तक पहुँचाना उनकी अटूट इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
यह उन लाखों युवाओं के लिए संदेश है जो संसाधनों की कमी के कारण हार मान लेते हैं कि अगर इरादे नेक हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी लोग इस पिता-पुत्र की जोड़ी की सराहना कर रहे हैं। ऐसे जमीनी नेताओं के आने से संगठन को भी मजबूती मिलती हैl क्योंकि उन्हें आम आदमी की समस्याओं का गहरा अनुभव होता है। सुरजीत के परिवार का राजनीति से कोई लेना देना नहीं था।
उनका परिवार तो अपना जीवन यापन करने में लगा हुआ था। मगर सुरजीत जैसे ही पढ़ाई के लिए धर्मशाला कॉलेज पहुंचा तो एनएसयूआई के लिए काम करने लगा। उसके बाद वे युवा कांग्रेस के लिए समर्पित हो गया।
सुरजीत सिंह भरमौरी ने संसाधनों की कमी होते हुए भी कांग्रेस के प्रति पूरी निष्ठा बनाई रखी।
उन्होंने बर्फ और गर्मी की तपश को सहन करते हुए दिन रात कांग्रेस के लिए काम किया। सुरजीत की पार्टी के प्रति निष्ठा के चलते ही वे आज राहुल गाँधी के चहेतों में से एक हैं।