हिमाचल की पहाड़ी गाय गौरी के संवर्धन के लिए 4.64 करोड़ रुपये का प्रोजैक्ट मंजूर – वीरेन्द्र कंवर

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स्टेट वेटरिनरी काउंसिंल के जोनल सैमिनार में पशुपालन मंत्री ने दी जानकारी
ऊना  – ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि, मत्स्य व पशुपालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा है कि हिमाचल की पहाड़ी गाय गौरी के संवर्धन के लिए केन्द्र सरकार ने 4.64 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहाड़ी गाय पर अनुसंधान कर इनकी नसल में सुधार करेगी जिसके लिए एक रिसर्च सैंटर स्थापित किया जाएगा। इसके लिए जगह चयनित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस सैंटर के खुलने से जहां पहाड़ी गाय पर शोध होगा वहीं प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे। वीरेन्द्र कंवर ने कहा कि हिमाचल की पहाड़ी गाय को गौरी नाम दिया गया है तथा पशुपालन विभाग के माध्यम से गौरी के संरक्षण और नसल सुधार पर कार्य किया जाएगा। यह बात पशुपालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने बंगाणा में आयोजित हिमाचल प्रदेश राज्य वेटरिनरी काउंसिल के सैमिनार में कही।
वीरेन्द्र कंवर ने कहा कि इनाफ का कार्य हिमाचल प्रदेश में 99 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है और यह लक्ष्य हासिल करने वाला हिमाचल प्रदेश देश में पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बेसहारा गौवंश के पुनर्वास तथा प्रदेश की सड़कों को पशुमुक्त बनाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गौसदनों में 16500 बेसहारा गौवंश को आश्रय प्रदान किया गया है तथा प्रदेश सरकार ने मार्च 2022 तक प्रदेश की सड़कों को बेसहारा पशुमुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश में गौ अभ्यारणयों का निर्माण हो रहा है तथा मौजूदा गौसदनों का भी विस्तार किया जा रहा है। पशुपालन मंत्री ने कहा कि अपने पशुओं को सड़क पर छोड़ने वालों के विरुद्ध कड़े कानूनी नियम बनाए जा रहे हैं। सरकार पशु छोड़ने पर जुर्माना करने का अधिकार ग्राम पंचायत प्रधान की बजाय पशु चिकित्सा अधिकारी को प्रदान करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं की समस्या को खत्म करने के लिए प्रदेश सरकार पशुपालन विभाग के माध्यम से सैक्स सोर्टिड सीमन उपलब्ध करवा रही है। इन टीकों के माध्यम से 99 प्रतिशत बछड़ियाँ ही पैदा होंगी। पशुपालन मंत्री ने विभाग को निर्देश दिए कि यह टीके जिला मुख्यालयों पर उपलब्ध करवाए जाएं। उन्हेांने कहा कि पशुपालन विभाग को सुदृढ़ और जनजातीय क्षेत्रों में विभाग के खाली पदों को भरने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे अपनी कार्य प्रणाली को और अधिक बेहतर बनाएं ताकि पशुपालकों को हर योजना की जानकारी व लाभ मिल सके।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा कि जापान सरकार की मदद से जायका-2 परियोजना हिमाचल प्रदेश में लागू होने वाली है। इस परियोजना के तहत न केवल किसान के खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा बल्कि डेयरी व मत्स्य पालन की गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा ताकि पानी उपलब्ध होने के बाद किसान अन्य गतिविविधियों में भी शामिल होकर मुनाफा कमा सकें। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में छोटे किसानों की संख्या बहुत अधिक है। ऐसे में मिश्रित किसानी, पशुपालन मत्स्य पालन जैसी गतिविधियां किसानों की आय को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की आय को दुगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है तथा इस कार्य में पशुपालन विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कंवर ने सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों का आहवान किया कि वे इस दिशा में अपना भरपूर सहयोग दें और किसानों की मदद करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया है। इसमें से एक लाख करोड़ रुपये कृषि तथा 20 हजार करोड़ रुपये पशुपालन पर खर्च करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से पहले भारत में पीपीई किट्स नहीं बनती थीं लेकिन अब भारत 125 देशों को पीपीई किट्स और मास्क का निर्यात कर रहा है।
इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष अशोक शर्मा, पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ अजमेर सिंह डोगरा, हिमाचल प्रदेश वेटरिनरी काउंसिल के प्रेसिडेट डॉ एचएस राणा, रजिस्ट्रार डॉ प्रदीप कुमार शर्मा, वेटरिनरी कॉलेज पालमपुर के डीन डॉ मनदीप शर्मा, उपनिदेशक पशुपालन विभाग ऊना डॉ जय सिंह सेन सहित काउंसिल के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना जिलों के लिए आयोजित की गई थी तथा इस कार्यशाला में पशुपालन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण मदों पर विस्तार से चर्चा हुई।
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