₹3 लाख के KCC ऋण मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक की भूमिका पर सवाल

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बैंक प्रबंधन की कार्यप्रणाली भी घेरे में, KCC ऋण मामले में बैंक की आंतरिक व्यवस्था पर सवाल, नाबार्ड से स्वतंत्र जांच की मांग

एएम नाथ। सोलन : जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े वर्ष 2009 के ₹3 लाख किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण प्रकरण में उप-पंजीयक सहकारी समितियां, पूर्वी मंडल शिमला के 9 जुलाई 2026 के आदेश के बाद बैंक की ऋण वितरण प्रक्रिया और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। मामला अपील संख्या 413/2020 से संबंधित है, जिसे संतोष कुमार ने बैंक के खिलाफ दायर किया था।
आदेश में दर्ज तथ्यों के अनुसार बैंक ने ऋण खाते में मूलधन, ब्याज और अन्य मदों समेत कुल ₹5,70,228 की वसूली का दावा किया था। दूसरी ओर, अपीलकर्ता का कहना था कि उसे पूरी ऋण राशि प्राप्त नहीं हुई और उसके खाते में केवल ₹10,000 जमा किए गए।
मामले की जांच रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के निर्देश पर जिला निरीक्षक, सहकारी समितियां, सोलन द्वारा की गई थी। जांच रिपोर्ट 24 जनवरी 2020 को प्रस्तुत की गई। आदेश में दर्ज जांच निष्कर्षों के अनुसार, 24 फरवरी 2009 को अपीलकर्ता सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बघेरी में ड्यूटी पर मौजूद था। जांच में यह भी कहा गया कि पूरी ऋण राशि उसे वितरित नहीं हुई तथा ऋण राशि की निकासी से संबंधित लेन-देन तत्कालीन शाखा प्रबंधक द्वारा कथित रूप से धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से किया गया।
बैंक की ओर से चेक पर अपीलकर्ता के हस्ताक्षर होने को राशि निकासी का आधार बताया गया था। हालांकि, उप-पंजीयक ने माना कि केवल हस्ताक्षर होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि राशि वास्तव में अपीलकर्ता ने ही निकाली थी।
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ऋण दस्तावेजों में गारंटर के रूप में दर्ज रूप चंद ने अपने बयान में अपीलकर्ता को जानने और उसके ऋण में गारंटर बनने से इनकार किया। आदेश में कहा गया कि विभागीय जांच स्वतंत्र विभागीय प्राधिकारी द्वारा रिकॉर्ड की जांच के बाद की गई थी और बैंक की ओर से उसके निष्कर्षों को खारिज करने के लिए ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम पाल वर्तमान में बैंक में AGM पद पर कार्यरत हैं और उनके खिलाफ चार FIR दर्ज हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राम पाल को बैंक मुख्यालय में शिकायत निवारण अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे हितों के टकराव का प्रश्न उठता है।
शर्मा ने नाबार्ड से मामले की स्वतंत्र एवं समयबद्ध सतर्कता जांच, मूल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा ऋण राशि के पूरे प्रवाह की जांच की मांग की है। आपराधिक दोषसिद्धि का प्रश्न सक्षम आपराधिक न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।

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