एएम नाथ ।शिमला। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर जिला परिषद चुनाव टालने और प्रशासन के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव की तारीख घोषित नहीं की गई। जयराम ठाकुर ने चेतावनी दी कि दो दिन में चुनाव की तारीख तय नहीं हुई तो भाजपा हाईकोर्ट का रुख करने के साथ उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना देगी। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 22 जनवरी 2026 को समाप्त हो गया था। संविधान और पंचायती राज अधिनियम की भावना के अनुसार समय पर परिसीमन एवं अन्य प्रक्रियाएं पूरी कर चुनाव संपन्न होने चाहिए थे, लेकिन कांग्रेस सरकार ने जानबूझकर चुनाव टालने की रणनीति अपनाई।
पहले आपदा का हवाला देकर डिजास्टर एक्ट के माध्यम से चुनाव स्थगित करने का प्रयास किया गया। जब भाजपा न्यायालय गई तो हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने चुनाव कराने का आदेश दिया। इसके बाद सरकार सर्वोच्च न्यायालय पहुंची, लेकिन वहां से भी चुनाव निर्धारित समय के भीतर कराने का निर्देश मिला। अंततः सरकार को मजबूर होकर चुनाव कराने पड़े।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले से अंदेशा था कि चुनाव परिणाम कांग्रेस के खिलाफ जाएंगे और वही हुआ। पंचायतों, ब्लॉक समितियों, नगर निकायों और जिला परिषदों के परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि जनता कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों को अस्वीकार कर चुकी है। उन्होंने कहा कि 12 जिलों में से 10 जिलों में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिनमें 9 जिलों में कांग्रेस अपने प्रत्याशी तक खड़े नहीं कर सकी और भाजपा समर्थित उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में भाजपा समर्थित प्रधान चुने गए हैं।
नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनावों में भी जनता ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया है। धर्मशाला, मंडी और सोलन नगर निगमों में भाजपा ने बहुमत प्राप्त कर मेयर और डिप्टी मेयर चुने, जिससे जनता का रुझान स्पष्ट दिखाई देता है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद भी सरकार जनादेश स्वीकार करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज नियमों में संशोधन कर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव को अनिश्चितकाल तक टालने का रास्ता बनाया गया।
पहले नियमों में मतदान के सात दिनों के भीतर चुनाव कराने का स्पष्ट प्रावधान था, लेकिन सरकार ने 18 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी कर उसमें संशोधन कर दिया। हाल ही में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौरा ब्लॉक समिति मामले में स्पष्ट कहा कि किसी अधिकारी को चुनाव प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक टालने का अधिकार नहीं है, क्योंकि मूल अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। जयराम ठाकुर ने कहा कि शिमला जिला परिषद में कुल 25 निर्वाचित सदस्य हैं, जिनमें 13 भाजपा समर्थित सदस्य निर्वाचित हुए हैं तथा अन्य सदस्यों का भी भाजपा को समर्थन प्राप्त है। इसके बावजूद सरकार चुनाव की तिथि घोषित नहीं कर रही। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन मुख्यमंत्री के राजनीतिक दबाव में कार्य कर रहा है और लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया जा रहा है।
