हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर …38 दिन में 150 मौतें, 190 सड़कें बंद, 834 करोड़ का नुकसान

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एएम नाथ । शिमला : हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर लगातार जारी है. भारी बारिश, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 30 जून से 7 अगस्त 2026 तक मानसून जनित घटनाओं में 150 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 226 लोग घायल हुए हैं। वहीं दो लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

मानसून की मार से हिमाचल प्रदेश को अब तक 834 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हो चुका है. सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में कांगड़ा, चंबा, शिमला और मंडी शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं में 197 पशुओं की मौत हुई है. वहीं 22 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि 41 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. कृषि और बागवानी क्षेत्र भी बारिश और आपदा की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

लैंडस्लाइड और सड़क हादसे बने मौत की बड़ी वजह : 

प्रदेश में मानसून के दौरान सबसे ज्यादा मौतें भूस्खलन, चट्टान और पेड़ गिरने, डूबने और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण हुई हैं. इसके अलावा सड़क हादसों ने भी बड़ी संख्या में लोगों की जान ली है. रिपोर्ट के मुताबिक प्री-मानसून सीजन में भी हिमाचल में 65 लोगों की मौत हुई थी. वहीं सड़क दुर्घटनाओं में अलग से 78 लोगों की जान गई है. पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण सफर करना भी जोखिम भरा बना हुआ है।

190 सड़कें बंद, मंडी और कुल्लू सबसे ज्यादा प्रभावित

राज्य आपदा प्रबंधन की 8 अगस्त दोपहर 1 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 190 सड़कें अभी भी बंद हैं. इनमें सबसे ज्यादा असर मंडी जिले में है, जहां 91 सड़कें बाधित हैं. वहीं कुल्लू जिले में 42 सड़कें बंद पड़ी हैं. सड़कें बंद होने से कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है. प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें सड़कों को बहाल करने में जुटी हुई हैं।

बिजली-पानी की सेवाएं भी प्रभावित, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी : बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में बिजली और पेयजल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं. राज्य में 59 बिजली ट्रांसफार्मर (DTR) बंद हैं, जिनमें अकेले कुल्लू जिले में 53 ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं. इसके अलावा 77 पेयजल योजनाएं भी बाधित हैं, जिसमें सिरमौर जिले की 55 योजनाएं शामिल हैं. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों के आसपास जाने से बचें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें. साथ ही मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है. मानसून के अभी सक्रिय रहने की संभावना के बीच प्रशासन ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं।

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