20 लाख तक ऋण एक प्रतिशत ब्याज की दर से निर्धन परिवार के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए उपलब्ध करवाने की योजना बन रही : मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू

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शिमला : सहकारी बैंक विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण प्रदान करें, जिनकी गारंटी सरकार देगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना की योजना के लिए सहकारी बैंक को प्रमुख बैंक बनाएगी। निर्धन परिवार के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख तक ऋण एक प्रतिशत ब्याज की दर से उपलब्ध करवाने की योजना बन रही है।
सरकार ई-टैक्सी, ई-बस और ई-ट्रक की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान देगी। सरकार 250 किलोवाट से 2 मेगावाट तक सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए 40 प्रतिशत वित्तीय मदद देगी। उत्पादित बिजली राज्य विद्युत बोर्ड की ओर से खरीदी जाएगी। कहा कि सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली के विस्तार के लिए छह महीने में सुधारों को लागू किया जाएगा।
सुक्खू ने राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड यानी एचपीएससीबी की ओर से रविवार को शिमला में आयोजित स्पार्क-2023 कार्यक्रम में बैंक के नए चिह्न (लोगो) का अनावरण किया। उन्होंने बैंक की इंटरनेट बैंकिंग सुविधा एकेडमी फॉर एग्रीकल्चर एंटरप्रिन्योरशिप डेवलपमेंट फॉर ग्रोथ एंड एम्वावरमेंट (एग्री एज) और नई वेबसाइट भी शुरम्की। बैंक का विजन डाक्यूमेंट भी जारी किया।
उन्होंने बैंक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शाखा कार्यालयों को पुरस्कार दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि सहकारी बैंकों को भूमि खरीदने के लिए प्राथमिकता के आधार पर हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू-सुधार अधिनियम -1972 की धारा- 118 के तहत अनुमतियां दी जाएंगी। एचपीएससीबी के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम ने मुख्यमंत्री का किया। उन्होंने बैंक की ओर से सुक्खू को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 2 करोड़ का चेक भेंट किया। उन्होंने ने कहा कि राज्य में 12000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, लेकिन राज्य के हिस्से के रूप में केवल 12 प्रतिशत बिजली मिल रही है। यह राज्य के लोगों के साथ अन्याय है। पे-बैंक अवधि पूरी कर चुकी जलविद्युत परियोजनाओं में राॅयल्टी बढ़ाने का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया है। शानन परियोजना को वापस लेने के लिए बातचीत हो चुकी है।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पिछली सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन ने राज्य पर 75,000 करोड़ के कर्ज का बोझ डाला गया है। चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद मुख्यमंत्री के दृढ़ निश्चय के कारण सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी गई है। उन्होंने प्रदेश को आर्थिक रूप से अस्थिर करने के प्रयासों और राज्य को वित्तीय सहायता देने में बाधाएं उत्पन्न करने पर भी चिंता जताई।
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