20 रुपये के नकली सिक्कों का बड़ा खेल! 6 महीने में 70 करोड़ चलाने का दावा, पंजाब के सरगना समेत 5 गिरफ्तार

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सोनीपत में रोजाना 10-12 हजार नकली सिक्के बनाने की क्षमता का दावा; सहारनपुर में नई फैक्ट्री लगाने की तैयारी के दौरान पुलिस ने दबोचा गिरोह

सहारनपुर/सोनीपत। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने 20 रुपये के कथित नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने हरियाणा के सोनीपत में मशीन और डाई की मदद से नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री लगा रखी थी और अब सहारनपुर में भी नई फैक्ट्री शुरू करने की तैयारी कर रहा था। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने पूछताछ में करीब छह महीने के दौरान 70 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के नकली सिक्के बाजार में चलाने की बात कबूल की है।

हालांकि, इस मामले में सोनीपत पुलिस का कहना है कि उसे सहारनपुर पुलिस की इस कार्रवाई या सोनीपत में कथित फैक्ट्री के संबंध में अभी जानकारी नहीं है। सोनीपत पुलिस के मुताबिक आरोपियों को सहारनपुर से ही गिरफ्तार किया गया है और यूपी पुलिस ने अभी तक सोनीपत के बड़ी इंडस्ट्री एरिया थाना क्षेत्र में कोई रेड नहीं की है।

पंजाब का रहने वाला बताया गया मुख्य सरगना

सहारनपुर के SSP अभिनंदन सिंह के अनुसार, गिरोह का मुख्य सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह, निवासी जीरकपुर, पंजाब है। पुलिस का कहना है कि वह करीब 25 साल से सिक्के बनाने के काम से जुड़ा हुआ था।

पुलिस के मुताबिक, उपकार शुरुआत में सुनार का काम करता था और चांदी के सिक्के बनाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हुई, जिनके संपर्क में आने के बाद उसने कथित तौर पर नकली सिक्के बनाने का काम शुरू कर दिया। मुनाफा बढ़ने के साथ उसने अपना नेटवर्क तैयार किया और अन्य लोगों को भी इसमें शामिल करता गया।

पुलिस के अनुसार, उपकार पहले जेल भी जा चुका है। तिहाड़ समेत अन्य जेलों में रहने के दौरान उसकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई और बाद में इनमें से कुछ लोग उसके नेटवर्क का हिस्सा बन गए।

सोनीपत में रोज 10-12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता का दावा

पुलिस जांच के अनुसार गिरोह ने सोनीपत के बड़ी इंडस्ट्री एरिया में कथित तौर पर नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री लगा रखी थी। यहां मशीन और डाई की सहायता से 20 रुपये के सिक्के तैयार किए जाते थे।

पुलिस का दावा है कि इस यूनिट में प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता थी। सिक्कों की फिनिशिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाता था, ताकि वे देखने में असली जैसे लगें और आम लोगों को आसानी से पता न चले कि वे नकली हैं।

दुकानों, शराब ठेकों और टोल पर खपाने का दावा

SSP के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि नकली सिक्कों को छोटे दुकानदारों के अलावा सरकारी शराब ठेकों और टोल टैक्स पर चलाया जाता था।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिक्कों की सप्लाई किन लोगों के जरिए की जाती थी और अलग-अलग राज्यों में इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करीब छह महीने में 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में चलाने का दावा किया है। इस दावे की जांच की जा रही है।

सहारनपुर में दूसरी फैक्ट्री लगाने की तैयारी

पुलिस के मुताबिक, गिरोह सोनीपत के बाद सहारनपुर में भी नकली सिक्कों की फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए जमीन और अन्य संसाधनों की व्यवस्था की जा रही थी। पुलिस का दावा है कि नई फैक्ट्री शुरू होने से पहले ही गिरोह के सदस्य उसके हत्थे चढ़ गए।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सहारनपुर में फैक्ट्री लगाने की योजना में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके लिए किन लोगों से संपर्क किया गया था।

पांच आरोपियों की पहचान

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह निवासी जीरकपुर, पंजाब; हिमांशु उर्फ गुल्लू निवासी सहारनपुर; कुलदीप निवासी सहारनपुर; संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन निवासी मधुबनी, बिहार और अनुराग पाल उर्फ लंकेश निवासी संत रविदास नगर, उत्तर प्रदेश के रूप में बताई है।

पांचों आरोपियों के खिलाफ सहारनपुर के कोतवाली नगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नकली सिक्कों के उत्पादन, सप्लाई और बाजार में खपाने के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

सोनीपत पुलिस बोली- यहां यूपी पुलिस ने नहीं की रेड

सोनीपत के बड़ी इंडस्ट्री थाना प्रभारी नीरज के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस ने आरोपियों को यूपी से ही गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों द्वारा सोनीपत में फैक्ट्री चलाने की बात सामने आने की जानकारी मिली है।

थाना प्रभारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी कथित तौर पर पूरा सामान एक वाहन में लोड करके ले जा रहे थे और इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस अभी तक बड़ी इंडस्ट्री एरिया थाना क्षेत्र में नहीं पहुंची है और न ही यहां कोई रेड की गई है।

अब जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कथित नकली सिक्कों का उत्पादन वास्तव में कहां हो रहा था, कितनी मात्रा में सिक्के तैयार किए गए और 70 करोड़ रुपये के सिक्के बाजार में चलाने के आरोप की वास्तविकता क्या है।

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