मानसा। पंजाब में नशे के खिलाफ संघर्ष करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का रविवार को 26 दिन बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। दीपावली के दिन चकेरियां रोड स्थित खेतों में उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ। अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में लोग, युवा, किसान संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि पहुंचे। अंतिम यात्रा के दौरान कई स्थानों पर लोगों ने फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पंजाब सरकार और मानसा पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।
शनिवार को पीजीआई चंडीगढ़ में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। रविवार सुबह करीब पांच बजे पार्थिव शरीर को मानसा लाया गया। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर समर्थकों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। घर पहुंचने पर परिवार ने अंतिम रस्में निभाईं। इसके बाद फूलों से सजी ट्रैक्टर-ट्रॉली में शव को अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाया गया। पिता भीम सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों ने अंतिम संस्कार की रस्मों में हिस्सा लिया।
पिता ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की
अंतिम संस्कार के दौरान भीम सिंह भावुक हो गए। उन्होंने पंजाब के युवाओं से नशे से दूर रहने और इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने नशे जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ संघर्ष किया और इसी लड़ाई में उसकी जान चली गई। दीपावली के दिन अंतिम संस्कार करने के पीछे भी युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देना उद्देश्य था।
भीम सिंह ने आंदोलन के दौरान परिवार का साथ देने वाली ज्वाइंट एक्शन कमेटी और सभी सामाजिक संगठनों का आभार जताया। झोटा की मां अमरजीत कौर ने भी कहा कि परिवार की प्राथमिक मांग पंजाब से नशे का खात्मा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार ने न तो मुआवजे की मांग की थी और न ही सरकारी नौकरी की। उनके अनुसार, परिवार चाहता है कि नशे के कारोबार पर रोक लगे और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचने का विरोध करने पर हुई थी हत्या
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा शहर के एक मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे। आरोप है कि एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचे जाने का विरोध करने पर मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार ने उन पर गोली चला दी। घटना में झोटा के चार साथी भी घायल हुए थे। पुलिस ने अगले दिन आरोपी को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया था।
हत्या के बाद परिवार और सामाजिक संगठनों ने न्याय की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया था। ज्वाइंट एक्शन कमेटी के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में किसान संगठनों और युवाओं ने भी भाग लिया। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई थी।
22 दिन के आंदोलन के बाद पोस्टमार्टम पर बनी सहमति
हत्या के बाद झोटा का शव मानसा सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया था। परिवार और समर्थकों ने करीब 22 दिन तक आंदोलन जारी रखा। 4 नवंबर को विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद पोस्टमार्टम करवाने पर सहमति बनी और आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।
6 नवंबर को शव पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाया गया। करीब 24 दिन तक डीप फ्रीजर में रखे रहने के कारण डॉक्टरों को शव को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य स्थिति में लाने में लगभग 14 घंटे लगे। इसके बाद पांच डॉक्टरों के विशेष बोर्ड ने करीब साढ़े छह घंटे तक पोस्टमार्टम किया। जांच के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय नमूने भी एकत्र किए गए। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
एसएसपी के तबादले तक भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान
बेटे के अंतिम संस्कार के बाद भी भीम सिंह ने मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी के तबादले की मांग वापस नहीं ली। उन्होंने कहा कि जब तक एसएसपी का तबादला नहीं होता, उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। वह 5 नवंबर से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने जांच भी की थी।
भीम सिंह का आरोप है कि क्षेत्र में नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने में प्रशासन नाकाम रहा। वहीं, एडीजीपी गौतम चीमा के अनुसार एसएसपी के तबादले की मांग सरकार और एक्शन कमेटी के बीच हुई आधिकारिक बातचीत का हिस्सा नहीं थी। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने भी भीम सिंह से बातचीत कर मामले का समाधान निकालने की बात कही थी।
सरकार ने सीबीआई जांच समेत कई फैसलों की घोषणा की
4 नवंबर को सरकार और ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बीच हुई बातचीत में कई फैसलों पर सहमति बनी थी। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की थी। इसके साथ ही मानसा के संबंधित थाना प्रभारी, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित करने तथा उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का फैसला लिया गया था।
सरकार की ओर से झोटा की पत्नी को योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी, परिवार को दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और उनकी याद में सरकारी स्थल पर प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की गई थी। मानसा में उनके नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया। गोलीबारी में घायल हुए चार लोगों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता और इलाज का खर्च देने तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर भी सहमति बनी थी।
हालांकि, परिवार ने साफ किया कि उसकी प्राथमिकता आर्थिक सहायता या नौकरी नहीं, बल्कि पंजाब को नशामुक्त बनाना और हत्याकांड के दोषियों को सजा दिलाना है।
हत्याकांड को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई
झोटा की हत्या के बाद पंजाब में नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को घेरा और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता सचिन पायलट, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और भाजपा के कई नेताओं ने परिवार से मुलाकात की थी।
ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई थी। अब परिवार और समर्थकों की निगाहें सीबीआई जांच और नशे के कारोबार के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। अंतिम संस्कार के साथ झोटा की पार्थिव देह को विदाई मिल गई, लेकिन परिवार ने साफ कर दिया है कि नशे के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
