4 महीने 11 दिन बाद डल्लेवाल का अनशन खत्म, किसान आंदोलन में नया मोड़?

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नई दिल्ली :  किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे जगजीत सिंह डल्लेबाल ने आखिरकार 4 महीने 11 दिन के लंबे अनशन के बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी. पंजाब सरकार ने इस बात की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी।  डल्लेवाल MSP समेत किसानों की विभिन्न मांगों के लोकर 26 नवंबर से आमरण अनशन पर बैठे थे. हालांकि, उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए किसान नेताओं और सहयोगियों ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी. इसके बाद ही उन्होंने पानी पीकर अपनी भूख हड़ताल खत्म की है.
किसान आंदोलन के बदलते समीकरण
इस घटनाक्रम से पहले, पंजाब पुलिस ने शंभू बॉर्डर और खनौरी पर धरने पर बैठे किसानों को हटा दिया था। इस दौरान पुलिस ने टेंट और अन्य सामान हटाने के लिए जेसीबी का उपयोग किया और करीब 1400 किसानों को हिरासत में लिया। पिछले साल 13 फरवरी से किसान संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में इन बॉर्डर्स पर डटे हुए थे।
डल्लेवाल के अनशन पर बैठने के बावजूद, सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और पंजाब सरकार ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जाहिर की थी, जिसके चलते आखिरकार  उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
क्या थीं किसानों की प्रमुख मांगें?
किसान लंबे समय से अपनी कुछ अहम मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं:-
MSP पर खरीद की गारंटी का कानून
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फसलों की कीमत
भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन
किसानों पर लगे आंदोलन से जुड़े मुकदमों की वापसी
किसानों के कर्ज की माफी और पेंशन योजना
फसल बीमा योजना का प्रीमियम सरकार द्वारा दिया जाए
लखीमपुर कांड के दोषियों को सजा
नकली बीज और खाद पर सख्त कानून
मसालों की खरीद पर एक आयोग का गठन
भूमिहीन किसानों के बच्चों को रोजगार की गारंटी
तो यह देखना दिलचस्प होगा कि…
किसानों के प्रति सरकार के रवैये पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी नाराजगी जताई थी. उन्होंने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से सवाल किया कि किसानों से किए वादों को
कितना निभाया गया? इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलको में हलचल तेज हो गई थी. अब जब जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अनशन तोड़ दिया है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार किसानों की मांगों को गंभीरत से लेकर कोई ठोस समाधान निकालती है या फिर यह आंदोलन किसी नए मोड़ की ओर बढ़ेगा।
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