बच्चों से भिक्षा मंगवाने वाले माता-पिता का किया जाएगा डी.एन.ए. टेस्ट: ज़िला प्रोग्राम
गढ़शंकर : सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री डॉ. बलजीत कौर के दिशा-निर्देशों और डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट जीवनजोत 2 चलाया जा रहा है। इसके तहत जिला प्रोग्राम अधिकारी गगनदीप सिंह के नेतृत्व में जिला बाल सुरक्षा अधिकारी हरप्रीत कौर की ओर से बाल भिक्षा रोकथाम जिला स्तरीय टास्क फोर्स ने आज गढ़शंकर में बाल भिक्षा रोकने के लिए छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान बंगा रोड, चंडीगढ़ रोड, नंगल रोड, नूरपुर बेदी रोड और बस स्टैंड गढ़शंकर, तहसील परिसर आदि स्थानों से 5 बच्चों को बाल भिक्षा से मुक्त कराया गया और उन्हें बाल कल्याण कमेटी के समक्ष पेश किया गया। बाल कल्याण कमेटी की ओर से बच्चों की काउंसलिंग की गई और बच्चों की भलाई को प्राथमिकता देते हुए उनके कल्याण के लिए निर्णय लिए गए।
जिला बाल सुरक्षा अधिकारी ने आम जनता से अपील की कि यदि कोई बच्चा भिक्षा मांगता या बाल मजदूरी करता हुआ पाया जाता है, तो इसकी सूचना बाल हेल्पलाइन 1098 पर दी जाए, ताकि आपकी एक पहल किसी बच्चे का जीवन बदल सके। उन्होंने बताया कि 0 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए पंजाब सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी जिला बाल सुरक्षा इकाई, होशियारपुर या बाल हेल्पलाइन 1098 पर फोन करके प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की छापेमारी पहले भी हो चुकी हैं और यह लगातार जारी रहेंगी। यदि कोई माता-पिता बच्चे से बाल भिक्षा करवाते पाए गए, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के संबंध में जिला बाल सुरक्षा इकाई, राम कॉलोनी कैंप के साथ हमेशा समन्वय किया जा सकता है।
इस अवसर पर जिला प्रोग्राम अधिकारी गगनदीप सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार बच्चों से भिक्षा मंगवाने वाले माता-पिता का डी.एन.ए. टेस्ट किया जाएगा और यदि रिपोर्ट मेल नहीं खाती, तो उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल कल्याण कमेटी की चेयरपर्सन हरजीत कौर ने बताया कि बाल भिक्षा करवाने के मामलों में अब तक जिला होशियारपुर में विभिन्न थानों में दो एफ.आई.आर. दर्ज की जा चुकी हैं।
इस छापेमारी के दौरान मोहित (सोशल वर्कर) जिला बाल सुरक्षा इकाई, दीक्षा, रणजीत कौर, थाना गढ़शंकर से ए.एस.आई. महेंद्र पाल और उनकी टीम, कुलदीप सिंह (काउंसलर) जिला बाल सुरक्षा इकाई, डॉ. परमहंस (स्वास्थ्य विभाग), और अमित कुमार (शिक्षा विभाग) शामिल हुए। बाल कल्याण कमेटी द्वारा बच्चों की काउंसलिंग की गई और उनकी भलाई को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए गए।
