6 शहीदों के नाम पहली बार आए सामने : ऑपरेशन सिंदूर का सबसे बड़ा खुलासा!

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नई दिल्ली । भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे साहसिक और गुप्त अभियानों में से एक, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर रक्षा मंत्रालय ने अब तक का सबसे बड़ा और भावुक कर देने वाला खुलासा किया है।

पिछले साल मई के महीने में सीमा पार दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारत मां के 6 अमर सपूतों के नाम पहली बार आधिकारिक तौर पर सरकार द्वारा जारी किए गए हैं। इस बेहद गोपनीय ऑपरेशन के बाद से ही इन नायकों की पहचान को लेकर देश में एक गहरा सस्पेंस बना हुआ था। अब सरकार ने न सिर्फ इनके नामों की घोषणा की है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि इन वीर नायकों के नाम देश की राजधानी दिल्ली में स्थित ‘नेशनल वॉर मेमोरियल’ (राष्ट्रीय समर स्मारक) की दीवारों पर हमेशा-हमेशा के लिए स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किए जाएंगे। इन छह सैनिकों में भारतीय सेना के पांच जांबाज और भारतीय वायु सेना का एक विंग कमांडर स्तर का सार्जेंट शामिल है, जिन्होंने देश की संप्रभुता के लिए हंसते-हंसते मौत को गले लगा लिया।

पहलगाम नरसंहार का वो खूनी मंजर: जिसने भारत को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए किया मजबूर

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में रची गई थी। आतंकियों ने वहां एक कायरतापूर्ण हमले को अंजाम देते हुए 26 मासूम और बेकसूर लोगों की बेरहमी से जान ले ली थी। इस नरसंहार ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और हर तरफ से सिर्फ एक ही आवाज आ रही थी-‘बदला’। भारत सरकार और सेना के आला कमान ने बिना वक्त गंवाए एक बेहद कड़ा और रणनीतिक फैसला लिया। पिछले साल 7 मई को भारतीय सेना और वायु सेना ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। भारत ने दुश्मनों की धरती पर घुसकर उनके लॉन्च पैड्स को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया। इस जवाबी सैन्य कार्रवाई को बेहद कूटनीतिक और प्रतीकात्मक नाम दिया गया था-‘ऑपरेशन सिंदूर’।

सिंदूर’: एक ऐसा नाम जिसने दुश्मन की रूह कंपा दी!

सेना ने इस ऑपरेशन के लिए ‘सिंदूर’ शब्द को यूं ही नहीं चुना था, बल्कि इसके पीछे एक बेहद गहरा और आक्रोश से भरा प्रतीकात्मक संदेश छिपा था। ‘सिंदूर’ उस लाल रंग के पवित्र धागे और पाउडर का प्रतीक है जिसे पारंपरिक रूप से विवाहित हिंदू महिलाएं अपनी मांग में सजाती हैं। पहलगाम आतंकी हमले में कई बेकसूर पतियों की मौत के बाद जिन महिलाओं का सुहाग उजड़ा था, जो महिलाएं असमय विधवा हुई थीं, उनके आंसुओं और उस सिंदूर के मिटने का बदला लेने के लिए ही इस ऑपरेशन का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा गया था। यह इस बात का सीधा संकेत था कि भारत अपने नागरिकों के सुहाग और सम्मान से खिलवाड़ करने वालों को उनकी ही सरजमीं पर दफन कर देगा। इस हमले के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिससे सीमा पर भयंकर हवाई झड़पें, आत्मघाती ड्रोन हमले और भारी गोलाबारी शुरू हो गई। दोनों देशों के बीच 4 दिनों तक चला यह भीषण और रोंगटे खड़े कर देने वाला संघर्ष आखिरकार 10 मई को थमा।

मिलिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के उन 6 अमर नायकों से, जिन्होंने इतिहास रच दिया

वर्ष 2025 में अलग-अलग सैन्य अभियानों के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों की जो नई सूची जारी हुई है, उसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के इन छह वीरों के नाम सबसे ऊपर रखे गए हैं। देश को गौरवान्वित करने वाले इन अमर शहीदों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. सूबेदार मेजर पवन कुमार (भारतीय सेना)
  2. राइफलमैन सुनील कुमार (भारतीय सेना)
  3. लांस नायक दिनेश कुमार (भारतीय सेना)
  4. अग्निवीर मुरली नाइक (भारतीय सेना)
  5. हवलदार सुनील कुमार सिंह (भारतीय सेना)

सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (भारतीय वायु सेना)

इन रणबांकुरों ने सीमा पार अग्रिम मोर्चे पर लड़ते हुए दुश्मन के कई आतंकियों को ढेर किया और खुद वीरगति को प्राप्त हुए। इनमें एक युवा अग्निवीर से लेकर अनुभवी सूबेदार मेजर तक शामिल थे, जो भारतीय सेना की अद्भुत एकता और जज्बे को दर्शाते हैं।

‘त्याग चक्र’ की 16 ग्रेनाइट दीवारों पर अमर होगी शहादत

अब इन छह परमवीरों के नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में और देश के दिल में दर्ज होने जा रहे हैं। नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल का सबसे पवित्र हिस्सा ‘त्याग चक्र’ देश के वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को समर्पित है। इस चक्र में ग्रेनाइट की 16 विशाल गोलाकार दीवारें बनाई गई हैं। आजादी के बाद से लेकर अब तक देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर करने वाले हर एक सैनिक का नाम, उनका रैंक और उनकी यूनिट का विवरण इन दीवारों पर लगी ईंटों पर बहुत ही सम्मान के साथ खुदा हुआ है। अब बहुत जल्द ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ये छह जांबाज भी इस भव्य स्मारक का एक स्थायी और गौरवशाली हिस्सा बन जाएंगे। जब भी देश की आने वाली पीढ़ियां इन ग्रेनाइट दीवारों के सामने से गुजरेंगी, तो सूबेदार मेजर पवन कुमार और अग्निवीर मुरली नाइक जैसे वीरों के नाम देखकर उनका सिर फख्र से ऊंचा हो जाएगा और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की यह खूनी मगर ऐतिहासिक गाथा सदियों तक भारतीयों को देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी।

 

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