सरकारों की अनदेखी का शिकार ऐतिहासिक ‘हरो दा पो’ को संभालने और विकसित करने का जिम्मा अब कार सेवा किला आनंदगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब के मुख्य संचालक बाबा सतनाम सिंह ने  संभाला

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माता हरो आठ किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाके से पानी मटकों में सिर पर पानी लाकर इस जगह राहगीरों को पिलाती थी
महाराजा रणजीत सिंह ने भी ‘माता हरो दा पो’ से पानी पी कर बुझाई थी प्यास
गढ़शंकर।  महाराजा रणजीत सिंह के कार्यकाल में गढ़शंकर के गांव सेखोवाल में माता हरो द्वारा लगाए ऐतिहासिक ‘हरो दा पो’ (राहगीरों के लिए पानी के रखे मटके की जगह ) को संभालने और विकसित करने का जिम्मा अब कार सेवा किला आनंदगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब के मुख्य संचालक बाबा सतनाम सिंह ने लिया है।  ‘हरो दा पो’ की ऐतिहासिक विरासत संभालने के लिए समय समय की सरकारों के कोई विशेष कार्य नहीं किया है। हालांकि समय समय की सरकारों ने ऐतिहासिक हरो दा पो को विकसित करने और माता हरो दे नाम पर इस जगह कोई यादगारी समारक बनाने के लिए कदम नहीं उठाया।
पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने आपने संसदीय कार्यकाल दौरान यात्रियों के लिए संसदीय कोष से माता हरो की याद में रेन शेलटर बनवाया था और पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने ढाई लाख रुपए  ‘हरो दा पो’  पर निर्माण के लिए दिए थे। जिससे वहां पर एक पानी की टंकी और बड़ा कमरा बनाया गया था। इसके इलावा अकाली भाजपा पंजाब सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2008 में  ‘हरो दा पो’  को बस स्टॉपेज बनाया और बस टिकट पर भी  ‘हरो दा पो’ बस स्टॉपेज अंकित होना शुरू कर दिया गया। लेकिन महाराजा रणजीत सिंह के कार्यकाल विरासती हरो दा पो को संभालने और विकसित करने के लिए  कोई विशेष काम नहीं किया।

कार सेवा किला आनंदगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब के मुख्य संचालक बाबा सतनाम सिंह ने ऐतिहासिक विरासत  ‘हरो दा पो’  को संभालने व विकसित करने और माता हरो की यादगार बनाने के जिम्मा उठाया है। जिसके तहत माता हरो की यादगार बनाने  और पीने  के पानी का ट्यूबवेल लगाया जायेगा।

माता हरो के वंशज विजय कुमार बिल्ला : पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने रेन शेल्टर यात्रियों की सहुलियत के लिए वनवाया था तो पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने ढाई लाख की ग्रांट गांव की पंचायत को दी थी। जिससे एक बड़ा कमरा बनाया गया और पानी की टंकी बनाई गई। इसके इलावा समय समय की सरकारों को दर्जनों बार मांग पत्र दिए लेकिन किसी ने ऐतिहासिकी विरासती  ‘हरो दा पो’ को संभालने की और  विकसित करने और माता हरो की यादगार बनाने के लिए कुछ नहीं किया। गढ़शंकर के विधायक व डिप्टी स्पीकर जय कृष्ण रौड़ी को  ‘हरो दा पो’  को सरकार द्वारा संभालने व विकसित करने के लिए चार बार ज्ञापन दिया। लेकिन आज तक एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी।

‘हरो दा पो’ का इतिहास : महाराजा रणजीत सिंह  कार्यकाल में गढ़शंकर के गांव सेखोवाल की बस्ती कंबाला की रहने वाली माता हरो रोजाना पहाड़ी इलाके से करीब आठ किलोमीटर दूर से पानी के मटके लेकर गांव से करीव दो किलोमीटर दूर गढ़शंकर श्री आनंदपुर साहिब मार्ग पर  ‘हरो दा पो’  (राहगीरों के लिए पानी के रखे मटके की जगह ) पर पहुंचाती और इस रास्ते से गुजरने वाले राहगीर वहां पानी पी कर प्यास बुझाते और आराम करते थे। महाराजा रणजीत सिंह ने भी उस समय इस रास्ते से गुजरते हुए वहां पानी पी कर प्यास बुझाई थी।
फोटो :   ‘हरो दा पो’  की तस्वीरें , और कार सेवा किला आनंदगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब के मुख्य संचालक बाबा सतनाम सिंह, समाज सेवी दलजीत सिंह बैंस , ठेकेदार मनजिंदर सिंह अटवाल ,बाबा साहिब सिंह, सिमरन सिंह वड़ैच , कश्मीर सिंह सादड़ा ,हरजाप सिंह , हरपाल सिंह पाली ,चनन सिंह , गुरमैल सिंह और माता हरो के वंशज विजय कुमार बिल्ला व अन्य।

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