40 लाख की साइबर ठगी के आरोपी की जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कर दी खारिज

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पंचकूला :  फर्जी फेसबुक विज्ञापन के जरिए 40 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने आरोपित को राहत देने से साफ इंकार कर दिया। अदालत ने कहा कि जांच में सामने आए तथ्य बताते हैं कि आरोपित कई राज्यों में फैले एक संगठित आनलाइन ठगी नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है और उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।

ऐसे में इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को रद करना उचित नहीं होगा। जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की पीठ ने रौशन कुमार और एक अन्य आरोपित की उस याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर, आरोपपत्र और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य आरोपों को समर्थन देते हैं और इस मामले में तथ्यों की विस्तृत जांच व साक्ष्यों का मूल्यांकन निचली अदालत द्वारा ही किया जाएगा।

मामला कुरुक्षेत्र के एक व्यापारी की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा गया जिसमें खुद को विजाग स्टील का प्रतिनिधि बताने वाले व्यक्ति ने सीधे कंपनी से लोहे के तार की सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया था। विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को कंपनी का सेल्स अधिकारी बताया और बड़े ऑर्डर पर विशेष दरों पर सामग्री उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

कई किश्तों में हुआ भुगतान :  बातचीत के बाद शिकायतकर्ता ने स्टील सामग्री का ऑर्डर दिया और आरोपित द्वारा बताए गए बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से कई किश्तों में भुगतान कर दिया। जांच के दौरान सामने आया कि शिकायतकर्ता ने तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 40,82,272 रुपये ट्रांसफर किए। इसमें प्रारंभिक 40 टन सामग्री के ऑर्डर के लिए 21.2 लाख रुपये, बाद में ऑर्डर बढ़ाने के लिए 14.51 लाख रुपये और अतिरिक्त सामग्री के लिए 5.10 लाख रुपये शामिल थे।

शिकायत के अनुसार, भुगतान मिलने के बाद आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया और ऑर्डर की गई स्टील सामग्री कभी भेजी ही नहीं गई। जब काफी समय तक सामान नहीं मिला तो व्यापारी को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच एजेंसियों ने बताया कि आरोपियों और उनके साथियों ने एक प्रतिष्ठित स्टील कंपनी के नाम से फर्जी फेसबुक पेज बनाकर व्यापारियों को बड़ी मात्रा में माल सस्ते दामों पर उपलब्ध कराने का लालच दिया और उनसे बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए।

अदालत ने यह भी नोट किया कि जांच के दौरान आरोपियों के तार केरल, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और पंजाब सहित कई राज्यों में दर्ज इसी तरह के साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़े पाए गए हैं। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपी आदतन अपराधी प्रतीत होते हैं। इसलिए इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप करना उचित नहीं है और मामले की सुनवाई निचली अदालत में ही जारी रहेगी।

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