सीएम की चुप्पी उठाती है सवाल”… जयराम ठाकुर का बड़ा आरोप मुख्य सचिव विवाद पर गरमाई सियासत : सरकार पर हमलावर जयराम ठाकुर

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बेनामी डील और नियम उल्लंघन के आरोपों पर जांच की मांग तेज

एएम नाथ। शिमला :  प्रदेश में मुख्य सचिव (सीएस) से जुड़े विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर चर्चा है, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस पर मौन साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सदन से लेकर सड़क तक लोग सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन सरकार जवाब देने से बच रही है।
पत्रकारों से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया और आम जनमानस में इस मुद्दे पर लगातार चर्चा हो रही है। भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने भी विधानसभा में दो बार यह मामला उठाया और आरोप लगाया कि धारा 118 का उल्लंघन हुआ है तथा बेनामी लेन-देन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि एक एसडीएम स्तर के अधिकारी ने जांच कर निर्णय भी दिया है, ऐसे में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने इसे “अविश्वसनीय” बताते हुए कहा कि प्रदेश के सबसे बड़े नौकरशाह से जुड़े मामले की जानकारी मुख्यमंत्री को न होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, “यह कैसे संभव है कि प्रदेश का मुखिया इतने बड़े मुद्दे से अनभिज्ञ हो? यह सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भ्रष्ट अधिकारियों के दबाव में हैं और निर्णय लेने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं। ठाकुर ने कहा कि कई ऐसे अधिकारी, जिनकी छवि पहले संदिग्ध रही है, आज महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं और वही सरकार चला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री न तो नियमित मुख्य सचिव और डीजीपी की नियुक्ति कर पा रहे हैं और न ही प्रशासनिक स्तर पर जरूरी बदलाव कर पा रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि जब सुखविंदर सिंह सुक्खू विपक्ष में थे, तब उन्होंने एक मुख्य सचिव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसी अधिकारी को महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया। उन्होंने कहा कि यह दोहरा रवैया है और इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं।
जयराम ठाकुर ने मांग की कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मीडिया और जनता के सवालों से बच नहीं सकते और उन्हें पारदर्शिता के साथ जवाब देना होगा। इस विवाद ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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