चंडीगढ़ : पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की शीर्ष नेतृत्व बैठक में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ संभावित चुनावी गठबंधन का मुद्दा प्रमुखता से उभरकर सामने आया।
सूत्रों के मुताबिक आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं ने पंजाब भाजपा के नेताओं से मौजूदा राजनीतिक हालात पर फीडबैक लिया और शिअद के साथ चुनावी समझौते की संभावनाओं को लेकर उनकी राय जानी। बैठक के दौरान भाजपा के कई नेताओं ने अकाली दल के साथ तालमेल की वकालत भी की।
चंडीगढ़ में आयोजित करीब आठ घंटे चली मैराथन बैठक में आरएसएस के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार, भाजपा के संगठन महासचिव बी.एल. संतोष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ समेत संघ और भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। आरएसएस की ओर से पंजाब संगठन सचिव मंत्री श्रीनिवासुलु और वरिष्ठ पदाधिकारी सौदान सिंह ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
सूत्रों की माने बैठक का मुख्य एजेंडा पंजाब की राजनीतिक स्थिति का आकलन करना और 2027 विधानसभा चुनावों के लिए संगठनात्मक रणनीति तैयार करना था। इसी दौरान भाजपा और शिअद के रिश्तों तथा भविष्य में संभावित चुनावी सहयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। भाजपा के कई नेताओं का मानना था कि राज्य के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए शिअद के साथ गठबंधन के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि पारंपरिक सिख और ग्रामीण वोट बैंक में पैठ बनाने के लिए यह समीकरण पार्टी को लाभ पहुंचा सकता है।
हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व का रुख फिलहाल अलग नजर आ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि भाजपा का लक्ष्य पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ना है। ऐसे में गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा। बैठक में भाजपा के बढ़ते वोट शेयर और संगठन विस्तार की भी समीक्षा की गई। नेताओं को बताया गया कि 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर 9.63 प्रतिशत था, जो 2024 में बढ़कर 18.56 प्रतिशत तक पहुंच गया।
आरएसएस ने इस बढ़त को आधार बनाकर किसान, युवा, महिलाएं, अनुसूचित जाति, ओबीसी और डेरा अनुयायियों सहित विभिन्न वर्गों तक पहुंच मजबूत करने पर जोर दिया। धार्मिक परिवर्तन, कानून-व्यवस्था, नशे का मुद्दा, आर्थिक चुनौतियां और सीमा पार आतंकवाद के खतरे को आगामी चुनावों के प्रमुख मुद्दों के रूप में चिन्हित किया गया। बैठक में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान के संबंध में सुनाए गए फैसले के राजनीतिक असर पर भी चर्चा हुई।
आरएसएस नेतृत्व ने बैठक में कहा कि संघ परिवार ने हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्यों में संगठनात्मक मजबूती के दम पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इसी तर्ज पर पंजाब में भी भाजपा के विस्तार और बेहतर चुनावी प्रदर्शन की संभावना जताई गई। साथ ही कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर नए सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने का संदेश दिया गया।
