लुधियाना: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर चल रही चर्चा एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। लुधियाना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने की मांग उठाई।
चन्नी और पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू की मौजूदगी में रंधावा ने कहा कि पंजाब को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो जनता की समस्याओं को समझे और प्रभावी तरीके से उनका समाधान कर सके। उन्होंने चन्नी के करीब 111 दिनों के मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान कई जनहितैषी फैसले लिए गए, जिनका असर आज भी लोगों को याद है।
रंधावा ने कहा कि चन्नी के पास प्रशासन चलाने का अनुभव होने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी मजबूत पकड़ है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए चन्नी आम लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनते थे और जरूरत पड़ने पर संबंधित मंत्रियों व अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करवाते थे।
चन्नी के बयानों से हाईकमान के सामने चुनौती
दूसरी ओर, 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में सज्जन कुमार को लेकर चन्नी के तीखे रुख और केंद्रीय नेतृत्व पर की गई टिप्पणियों ने कांग्रेस हाईकमान के सामने एक अलग राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की मांग के बीच पार्टी नेतृत्व के लिए पंजाब में अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन कायम रखना अहम होगा।
मंच पर दिखी एकजुटता
लुधियाना के कार्यक्रम में चन्नी, रंधावा और भारत भूषण आशू की एक साथ मौजूदगी को भी पार्टी की आंतरिक राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीनों नेताओं की संयुक्त मौजूदगी से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता का संदेश देने की कोशिश नजर आई।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर उठी यह मांग आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को लेकर चर्चा को और हवा दे सकती है।
