विधायक डॉ. हंसराज ने उठाया संस्थानों की बहाली का मुद्दा
कहा, छह किलोमीटर पैदल स्कूल जाते हैं बच्चे, बिजली के खंभे-मीटर के लिए भी तरसते हैं लोग
एएम नाथ। शिमला : चम्बा जिले के अति दुर्गम चुराह विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा। चुराह के विधायक डॉ. हंसराज ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से आग्रह किया कि चम्बा की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यहां के क्षेत्रों को मैदानी जिलों की तर्ज पर नहीं, बल्कि विशेष प्राथमिकता के साथ देखा जाए। उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों से क्षेत्र के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
डॉ. हंसराज ने कहा कि चुराह, भरमौर, भटियात, डलहौजी और चम्बा के कई क्षेत्र भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम हैं। ऐसे में संस्थानों का खुलना लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऊना और हरोली जैसे अपेक्षाकृत सुलभ क्षेत्रों में कई कॉलेज हैं, जबकि चुराह जैसे दुर्गम इलाकों में उच्च शिक्षा के संस्थानों की कमी विद्यार्थियों को प्रभावित कर रही है।
विधायक ने बिजली व्यवस्था की समस्या भी सदन में रखी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को एक-एक खंभे, तार और बिजली मीटर के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। बड़ी मुश्किल से चुराह में बिजली बोर्ड का डिवीजन स्थापित हुआ था और एक्सईएन सहित स्टाफ की तैनाती हुई, लेकिन व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकी। बैरागढ़ और कोहाल में खोले गए पीएससी को भी उन्होंने क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
शिक्षा के मोर्चे पर डॉ. हंसराज ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में बच्चे प्राथमिक स्कूल तक पहुंचने के लिए छह-छह किलोमीटर तक जाने को मजबूर हैं। मसरूंड में खुले डिग्री कॉलेज में 58 विद्यार्थियों के दाखिले होने के बावजूद इसके डीनोटिफाई होने से स्थानीय युवाओं की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने सरकार से डीनोटिफाई किए गए संस्थानों को दोबारा खोलने की मांग की।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने डॉ. हंसराज की सक्रियता की सराहना करते हुए उन्हें ‘डायनामिक विधायक’ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार चम्बा जिले का विशेष ध्यान रख रही है और वह स्वयं चुराह का दौरा कर जमीनी हालात का आकलन करेंगे। जरूरत के अनुसार डॉक्टरों और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने का आश्वासन भी दिया।
बिजली बोर्ड के एक्सईएन कार्यालय को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग और एएमआर जैसी तकनीकों के आने से व्यवस्था बदल रही है। सरकार बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए तकनीकी विकल्पों पर गंभीरता से विचार करेगी।
