गढ़शंकर, 3 सितंबर। जेजों-माहिलपुर सड़क के निर्माण को अभी करीब दो वर्ष ही हुए हैं, लेकिन सड़क की हालत एक बार फिर खराब हो गई है। सड़क के विभिन्न हिस्सों में जगह-जगह गड्ढे और टूट-फूट वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक नेताओं ने सड़क के बार-बार क्षतिग्रस्त होने को लेकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं।
करीब डेढ़ वर्ष पहले चंडीगढ़ चौक, माहिलपुर में जेजों-माहिलपुर तथा माहिलपुर-कोटफतुही सड़कों के सुदृढ़ीकरण कार्य का उद्घाटन तत्कालीन लोक निर्माण विभाग मंत्री ने किया था। उस समय सड़क निर्माण में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का भरोसा दिया गया था। लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद से ही सड़क पर जगह-जगह टूट-फूट सामने आने लगी।
लेबर पार्टी के नेता जय गोपाल धीमान ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों और आवश्यक सावधानियों का उचित ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि जेजों-माहिलपुर सड़क निर्माण के बाद से अब तक कई बार क्षतिग्रस्त हो चुकी है और करीब सातवीं बार इसकी मरम्मत की जरूरत पड़ रही है। सड़क के एक दर्जन से अधिक स्थानों पर टूट-फूट होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि माहिलपुर-कोटफतुही सड़क की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। करीब डेढ़ वर्ष पहले तैयार हुई इस सड़क पर निर्माण के बाद से ही कई स्थानों पर गड्ढे बनने लगे थे। संबंधित ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा अब तक कई बार इन स्थानों की मरम्मत किए जाने के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
इस मामले को लेकर अकाली दल के नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री सोहन सिंह ठंडल, भाजपा नेता तिलक राज चौहान तथा अन्य सदस्यों ने भी सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण के महज दो साल के भीतर सड़क को बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ रही है, तो इसकी गुणवत्ता की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि सड़क का किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी एजेंसी से निरीक्षण करवाया जाए। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर यह पता लगाया जाए कि सड़क इतनी जल्दी क्यों क्षतिग्रस्त हो रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि सड़क के निर्माण के बाद यदि पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की है, तो दो वर्ष के भीतर ही बार-बार मरम्मत की आवश्यकता पड़ना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि केवल गड्ढों पर पैचवर्क करने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
वहीं, इस संबंध में जब गुरतेज परमार ने सहायक अभियंता, गढ़शंकर से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण के बाद पांच वर्ष तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सड़क की कई बार मरम्मत करवाई जा चुकी है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सड़क की वर्तमान स्थिति का मौके पर निरीक्षण कर इसकी गुणवत्ता की जांच की जाए, ताकि बार-बार होने वाली टूट-फूट से निजात मिल सके और वाहन चालकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
फोटो कैप्शन:
जेजों-माहिलपुर सड़क पर जगह-जगह पड़े गड्ढे और क्षतिग्रस्त सड़क का दृश्य।
