सुल्तानपुर लोधी: ऑस्ट्रेलिया में रोजगार और बेहतर भविष्य का सपना लेकर विदेश गए पंजाब के 33 और राजस्थान के एक युवक के पिछले करीब 5 से 6 महीनों से तिमोर-लेस्ते में फंसे होने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया भेजने और वहां रोजगार दिलाने का झांसा देकर एजेंटों ने लाखों रुपये की रकम ऐंठ ली। अब परिवार अपने बच्चों की सुरक्षित भारत वापसी के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं।
इसी सिलसिले में आठ पीड़ित परिवारों ने निर्मल कुटिया, सुल्तानपुर लोधी पहुंचकर राज्यसभा सदस्य पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया और युवाओं की सुरक्षित वतन वापसी के लिए सहायता मांगी।
बताया गया कि इन दिनों संत सीचेवाल इंग्लैंड में हैं। परिवारों से बातचीत के बाद उन्होंने वहीं से भारत के विदेश मंत्रालय से संपर्क कर मामले में कार्रवाई शुरू करवाने का प्रयास किया है।
5 से 11 लाख रुपये तक लिए, कुल रकम करीब 3 करोड़
पीड़ित परिवारों के अनुसार, एजेंटों ने ऑस्ट्रेलिया में रोजगार दिलाने का भरोसा देकर प्रत्येक परिवार से करीब 5 से 11 लाख रुपये तक की रकम ली। परिवारों का दावा है कि यह राशि जुटाने के लिए उन्होंने घर और जमीन गिरवी रखने के साथ-साथ गहने भी गिरवी रखे तथा कर्ज लिया।
परिवारों के मुताबिक, रकम लेने के बाद युवाओं को भारत के अलग-अलग हवाई अड्डों से बाली और मलेशिया के रास्ते तिमोर-लेस्ते भेजा गया। बताया जा रहा है कि वहां पहुंचने के बाद एजेंटों ने युवाओं को मोगा जिले के बाघापुराना निवासी विजय नामक व्यक्ति के हवाले कर दिया और उनके पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए।
पासपोर्ट रखने और जबरन काम करवाने के आरोप
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि तिमोर-लेस्ते पहुंचने के बाद युवाओं को कथित तौर पर बंधक जैसे हालात में रखा गया। परिवारों का कहना है कि युवाओं को डराया-धमकाया जाता था, उनकी इच्छा के विरुद्ध मजदूरी करवाई जाती थी और मेहनत की कमाई भी कथित तौर पर नहीं दी जाती थी।
परिवारों ने यह भी आरोप लगाया कि युवाओं को पर्याप्त भोजन तक नहीं दिया जाता था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
विरोध के बाद मिले पासपोर्ट, 10 युवा लौटे भारत
बताया गया कि फंसे युवाओं ने एकजुट होकर इसका विरोध किया, जिसके बाद उन्हें अपने पासपोर्ट वापस मिल सके। इसके बाद स्थानीय पुलिस द्वारा विजय नामक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई है।
अब तक करीब 10 युवा अपने प्रयासों और खर्चे पर भारत वापस लौट चुके हैं, जबकि 34 युवा अभी भी तिमोर-लेस्ते में फंसे बताए जा रहे हैं।
फंसे युवाओं में मोगा के 8, जालंधर के 7, फिरोजपुर के 6, लुधियाना के 5, फाजिल्का के 2 तथा तरनतारन, कपूरथला, पटियाला और जलालाबाद से संबंधित एक-एक युवक शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं एक युवक राजस्थान का रहने वाला बताया गया है।
वीडियो जारी कर युवाओं ने मांगी थी मदद
यह मामला उस समय सामने आया, जब तिमोर-लेस्ते में फंसे युवाओं ने वीडियो जारी कर राज्यसभा सदस्य पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल से अपनी सुरक्षित वतन वापसी के लिए मदद की अपील की।
परिवारों ने केंद्र और पंजाब सरकार से भी मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर युवाओं को सुरक्षित भारत लाने तथा कथित एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
वापस लौटे युवाओं ने सुनाई आपबीती
जालंधर निवासी संदीप सिंह और राजप्रीत सिंह ने बताया कि उनके समेत 10 युवा लंबे संघर्ष के बाद भारत लौटने में सफल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तिमोर-लेस्ते पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए गए और उन्हें डराया-धमकाया जाता था।
युवाओं के अनुसार, उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करवाया जाता था और मेहनत की कमाई भी नहीं दी जाती थी। उन्होंने दावा किया कि कई बार उन्हें बहुत कम भोजन में गुजारा करना पड़ा।
वापस लौटे युवाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें वहां एक तरह से बंधक बनाकर रखा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि विजय नामक व्यक्ति द्वारा इससे पहले भी कई युवाओं को वहां कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था।
अब परिवारों की सबसे बड़ी चिंता तिमोर-लेस्ते में फंसे 34 युवाओं की सुरक्षित भारत वापसी को लेकर है।
