एएम नाथ। कांगड़ा, 27 सितंबर। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम के नवीनीकरण और सौंदर्यीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इसी बीच पंजाब के एक गुमनाम दानदाता ने मंदिर के लिए 3 किलो सोना और 6 क्विंटल चांदी देने का फैसला किया है। 3 किलो सोने का इस्तेमाल देवी चामुंडा के सिंहासन के लिए, जबकि 6 क्विंटल चांदी का उपयोग मंदिर के गर्भगृह की सजावट में किया जाएगा। दानदाता ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया है।
पहले से मौजूद 2.85 क्विंटल चांदी भी होगी शामिल
मंदिर अधिकारी राकेश कुमार के अनुसार, मंदिर में पहले से 2.85 क्विंटल चांदी उपलब्ध है। नई 6 क्विंटल चांदी के साथ कुल उपलब्ध चांदी का इस्तेमाल गर्भगृह को आकर्षक रूप देने के लिए किया जाएगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार दानदाताओं के सहयोग से परिसर में विभिन्न विकास और सौंदर्यीकरण कार्य करवाए जा रहे हैं।
गर्भगृह में वियतनाम, अन्य हिस्सों में मकराना मार्बल
नवीनीकरण के तहत गर्भगृह में वियतनाम से मंगवाया गया मार्बल लगाया जा रहा है, जबकि मंदिर के अन्य हिस्सों में राजस्थान के प्रसिद्ध मकराना मार्बल का इस्तेमाल हो रहा है। मार्बल लगाने का काम तेजी से चल रहा है और इसे इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। नंदकेश्वर मंदिर का सौंदर्यीकरण पूरा हो चुका है, जबकि यज्ञशाला का काम भी पूरा बताया गया है।
400 से 700 साल पुरानी धार्मिक परंपरा
कांगड़ा जिला प्रशासन के अनुसार, बनेर नदी के किनारे स्थित श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर की स्थापना से जुड़ी परंपरा करीब 400 से 700 वर्ष पुरानी बताई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी चामुंडा ने चंड और मुंड नामक असुरों का वध किया था।
एक ही धाम में शक्ति और शिव की उपासना
चामुंडा धाम की खास धार्मिक पहचान यह है कि यहां मां चामुंडा के साथ भगवान शिव के नंदिकेश्वर स्वरूप की भी पूजा होती है। मुख्य मंदिर के पीछे स्थित गुफानुमा स्थान में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। इसी कारण यह धार्मिक स्थल चामुंडा नंदिकेश्वर धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
स्वप्न में मिले संकेत, नदी किनारे मिला प्राचीन विग्रह
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, एक स्थानीय राजा और पुजारी ने देवी से प्रार्थना की थी कि उनके पवित्र स्थान को दुर्गम पहाड़ी से हटाकर ऐसे स्थान पर स्थापित किया जाए, जहां श्रद्धालुओं की पहुंच आसान हो। मान्यता है कि देवी ने पुजारी को स्वप्न में वर्तमान स्थान पर खुदाई करने का निर्देश दिया। खुदाई के दौरान प्राचीन विग्रह मिलने के बाद उसे वर्तमान स्थान पर स्थापित किया गया।
देश-विदेश से हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवविवाहित जोड़ों के भी मंदिर में दर्शन करने की परंपरा बताई जाती है। मंदिर के नवीनीकरण के साथ सोने और चांदी से होने वाला यह कार्य धाम के धार्मिक और स्थापत्य स्वरूप को और भव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
