तबादलों-पोस्टिंग और अन्य मामलों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच CBI को सौंपने के फैसले पर हरपाल चीमा बोले- राज्य सरकार जांच से पीछे नहीं हटेगी
चंडीगढ़, 5 अक्तूबर: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की ओर से सरकारी तबादलों, पोस्टिंग, टेंडर और अन्य मामलों में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपे जाने के फैसले को पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। यह जानकारी वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक के बाद चंडीगढ़ में पत्रकारों को दी।
चीमा ने कहा कि पंजाब में पहले की सरकारों की ओर से CBI के सीधे हस्तक्षेप को लेकर जो व्यवस्था लागू की गई थी, उसके मद्देनजर राज्य सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन CBI के सीधे हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ED के तीन पत्रों के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब के DGP को भेजे गए तीन पत्रों से जुड़ा है। इन पत्रों में सरकारी तबादलों और पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, टेंडर तथा अन्य सरकारी कामकाज में कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों का नाम भी सामने आया था।
वकील निखिल सराफ ने इस मामले में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि ED के पत्रों के बावजूद पंजाब पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया।
CBI को FIR दर्ज कर जांच के आदेश
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। अदालत ने CBI को दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। साथ ही पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को जांच में CBI को आवश्यक सहयोग देने का निर्देश दिया गया है।
हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। अदालत के आदेश के बाद अब पंजाब सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।
आरोपों की पुष्टि अभी जांच का विषय
ED की ओर से लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं और उनकी पुष्टि जांच के बाद होगी। पंजाब सरकार ने भी इन आरोपों के बीच CBI जांच के तरीके और अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति जताई है। अब सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की चुनौती के बाद इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय होगी।
