बरसात के बाद पठानकोट-जोगेंद्रनगर नैरोगेज रेलमार्ग पर परिचालन शुरू; बैजनाथ-पपरोला से फिलहाल चार ट्रेनें, यात्रियों को बढ़ी संख्या का इंतजार
एएम नाथ। बैजनाथ (कांगड़ा), 11 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी रेल सेवा एक बार फिर पटरी पर लौट आई है। बरसात के बाद रविवार से पठानकोट-जोगेंद्रनगर नैरोगेज रेलमार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही बहाल होने से यात्रियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, अभी सभी ट्रेनें पहले की तरह शुरू नहीं हुई हैं। बैजनाथ-पपरोला रेलवे स्टेशन से फिलहाल चार ट्रेनों का संचालन निर्धारित समय-सारणी के अनुसार किया जा रहा है।
बैजनाथ-पपरोला से चार ट्रेनों का संचालन
निर्धारित समय-सारणी के अनुसार, बैजनाथ-पपरोला स्टेशन से सुबह 8 बजे जोगेंद्रनगर के लिए ट्रेन रवाना होगी। सुबह 10 बजे ज्वालामुखी रोड के लिए रेल सेवा उपलब्ध होगी। इसके बाद दोपहर 2:15 बजे और 3:40 बजे पठानकोट के लिए ट्रेनें चलेंगी। इस तरह फिलहाल पठानकोट के लिए दो ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
चक्की रेल पुल क्षतिग्रस्त होने से बंद हुआ था मार्ग
चक्की रेल पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्ष 2022 में पठानकोट तक रेल परिचालन बाधित हो गया था। खबर में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुल के पुनर्निर्माण पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि बैजनाथ-पपरोला रेलवे स्टेशन के विकास पर लगभग सात करोड़ रुपये की लागत आई।
लंबे इंतजार के बाद रेल सेवा दोबारा शुरू होने से यात्रियों को राहत मिली है, लेकिन सीमित ट्रेनों के कारण पहले जैसी सुविधा अभी बहाल नहीं हो सकी है।
पहले पठानकोट के लिए चलती थीं छह ट्रेनें
पहले बैजनाथ-पपरोला और पठानकोट के बीच प्रतिदिन छह ट्रेनों का संचालन होता था। अब कम ट्रेनों के चलने से दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना समय-सारणी के अनुसार बनानी पड़ रही है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि आवागमन पहले की तरह सुविधाजनक हो सके।
164 किलोमीटर लंबा ऐतिहासिक रेलमार्ग
करीब 164 किलोमीटर लंबा पठानकोट-जोगेंद्रनगर नैरोगेज रेलमार्ग कांगड़ा घाटी की ऐतिहासिक पहचान है। ब्रिटिश शासनकाल में निर्मित यह रेलमार्ग अपने प्राकृतिक दृश्यों और पहाड़ी रास्तों के लिए जाना जाता है। इसमें सुरंगों और अनेक छोटे-बड़े पुलों से होकर ट्रेन गुजरती है।
कम किराया इस रेल सेवा की प्रमुख विशेषता है। खबर में बताया गया न्यूनतम किराया करीब 10 रुपये और अधिकतम करीब 35 रुपये तक है। इस कारण यह रेलमार्ग स्थानीय निवासियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
रेल सेवा की बहाली से लोगों को राहत जरूर मिली है, लेकिन यात्रियों की निगाहें अब ट्रेनों की संख्या बढ़ने और नियमित परिचालन पर टिकी हैं।
