पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला: औसत ACR के आधार पर प्रमोशन रोकने से पहले कर्मचारी को देना होगा पक्ष रखने का मौका

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पंजाब सरकार के तकनीकी शिक्षा विभाग के 4 मामलों में पदोन्नति की समीक्षा के आदेश; तीन महीने में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

चंडीगढ़। कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में औसत श्रेणी दर्ज होने के आधार पर उसे पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता, यदि रिपोर्ट की जानकारी देकर उसे अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया हो। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को यह महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए पंजाब सरकार के तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग से जुड़े चार मामलों में कर्मचारियों की पदोन्नति पर दोबारा विचार करने को कहा है।

जस्टिस कुलदीप तिवारी ने स्पष्ट किया कि ACR में दर्ज ऐसी श्रेणी, जिसका कर्मचारी के करियर और पदोन्नति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, उसकी जानकारी कर्मचारी को देना आवश्यक है। कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ऐसी रिपोर्ट के आधार पर पदोन्नति रोकना उचित नहीं है।

अदालत ने विभाग को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर समीक्षा प्रक्रिया पूरी की जाए। विभाग को संबंधित कर्मचारियों की औसत श्रेणी वाली रिपोर्टों को नजरअंदाज करते हुए नियमों के अनुसार उनकी पदोन्नति की पात्रता पर दोबारा निर्णय लेना होगा।

1996 में 26 पदों के लिए बनाया गया था 28 कर्मचारियों का पैनल

मामले में याचिकाकर्ताओं ने फोरमैन इंस्ट्रक्टर के पद पर पदोन्नति की मांग की थी। उनका कहना था कि निर्धारित योग्यता पूरी करने के बावजूद उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों को प्रमोशन दे दिया गया।

इन मामलों में तेजा सिंह का मामला भी शामिल था। उन्हें 21 अगस्त 1977 को कपूरथला के जूनियर टेक्निकल स्कूल में वर्कशॉप इंस्ट्रक्टर के पद पर अस्थायी नियुक्ति मिली थी। उनकी सेवाएं 1 अक्टूबर 1980 को नियमित कर दी गई थीं।

वर्ष 1996 में फोरमैन इंस्ट्रक्टर के 26 पदों पर पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति ने 28 पात्र कर्मचारियों का पैनल तैयार किया था। तेजा सिंह का नाम सूची में 27वें स्थान पर था। निर्धारित मानक पूरा नहीं कर पाने के कारण उन्हें पदोन्नति नहीं मिली। इसकी वजह उनकी ACR में दर्ज औसत श्रेणी बताई गई।

सरकार ने कहा—औसत श्रेणी प्रतिकूल प्रविष्टि नहीं थी

हाईकोर्ट में पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई कि उस समय लागू निर्देशों के तहत कर्मचारियों को केवल प्रतिकूल टिप्पणियों वाली ACR के बारे में सूचित किया जाता था। औसत श्रेणी को प्रतिकूल प्रविष्टि नहीं माना जाता था।

विभाग के अनुसार, पदोन्नति के लिए पिछले पांच वर्षों की ACR पर विचार किया गया था। तेजा सिंह की तीन रिपोर्ट औसत और दो अच्छी श्रेणी की थीं। इस कारण वह पदोन्नति के लिए निर्धारित अच्छे मानक को पूरा नहीं कर सके।

हालांकि, बाद में विभाग ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर औसत श्रेणी वाली रिपोर्टों की जानकारी कर्मचारियों को देने और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करने पर सहमति जताई। अदालत ने विभाग के इस रुख को विरोधाभासी माना।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन पर भी होगा विचार

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पदोन्नति की समीक्षा के दौरान ऐसी औसत श्रेणी वाली रिपोर्टों को नजरअंदाज किया जाए, जिनका प्रतिकूल असर संबंधित कर्मचारियों की पदोन्नति पर पड़ा था। इसके बाद विभाग नियमों के अनुसार उनकी पात्रता पर अंतिम निर्णय ले।

चूंकि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए अदालत ने उनकी पेंशन के काल्पनिक पुनर्निर्धारण पर भी विचार करने को कहा है। विभाग को यह आकलन करना होगा कि यदि कर्मचारियों को नियमानुसार पदोन्नति का लाभ मिलता, तो उनकी पेंशन पर क्या प्रभाव पड़ता।

अदालत ने सीधे पदोन्नति देने का आदेश नहीं दिया है। विभाग को तीन महीने के भीतर संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा कर नियमों के अनुसार फैसला लेना होगा।

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