रोहित जसवाल। ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बदाऊं गांव के पैरा एथलीट निषाद कुमार ने एशियाई पैरा खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया। मंगलवार को पुरुषों की ऊंची कूद टी-47 स्पर्धा में निषाद ने 2.04 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया और नया एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड बनाया। उनकी इस उपलब्धि से नागोया में भारतीय अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली।
निषाद ने प्रतियोगिता की शुरुआत से ही बेहतरीन लय दिखाई। उन्होंने 1.88 मीटर, 1.94 मीटर, 1.98 मीटर और 2.02 मीटर की ऊंचाई पहले ही प्रयास में पार कर ली। इसके बाद 2.04 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक के साथ नया गेम्स रिकॉर्ड कायम किया। स्वर्ण जीतने के बाद उन्होंने 2.06 मीटर की ऊंचाई पार करने का प्रयास किया, लेकिन इसमें सफल नहीं हो सके।
लंबी कूद में भी जीता था स्वर्ण पदक
निषाद कुमार ने इससे पहले सोमवार को पुरुषों की टी-47 लंबी कूद स्पर्धा में 7.11 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता था। खास बात यह है कि ऊंची कूद में अपनी पहचान बना चुके 27 वर्षीय निषाद पहली बार लंबी कूद में उतरे और पदार्पण में ही स्वर्ण पदक हासिल किया।
ऊंची कूद में भी स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा और बहुमुखी खेल क्षमता का परिचय दिया है। उनकी उपलब्धि से हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश में खुशी का माहौल है।
किसान पिता और मां के त्याग ने दिए सपनों को पंख
निषाद की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का संघर्ष और समर्पण भी अहम रहा है। उनके पिता रछपाल सिंह किसान हैं। बेटे के खेल और खानपान में कमी न आए, इसके लिए उन्होंने अतिरिक्त मेहनत कर सब्जियां उगाईं। वहीं, मां पुष्पा देवी ने मवेशी पालकर दूध बेचा और बेटे के खेल सफर में सहयोग दिया।
निषाद के पैतृक गांव बदाऊं में उनकी जीत के बाद जश्न का माहौल है। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। पिता रछपाल सिंह, मां पुष्पा देवी और बहन रमा देवी ने खुशी जताते हुए उनकी मेहनत और संघर्ष को याद किया।
2,500 रुपये लेकर प्रशिक्षण के लिए पहुंचे थे पंचकूला
निषाद कुमार का सफर संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। बचपन में एक हादसे में उनका हाथ कट गया था, लेकिन उन्होंने इस शारीरिक चुनौती को अपनी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने खेलों में प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। सामान्य वर्ग के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने ऊंची कूद में राज्य स्तर पर पहला स्थान हासिल किया।
बेहतर प्रशिक्षण की तलाश में वर्ष 2017 में निषाद महज 2,500 रुपये लेकर पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पहुंचे। वहां कोच नसीम अहमद ने उनकी प्रतिभा और लगन को पहचाना। वर्ष 2019 में उन्हें बंगलूरू के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में कोच सत्यनारायण के मार्गदर्शन में अभ्यास का अवसर मिला।
पैरालंपिक में रजत पदक, अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित
निषाद ने वर्ष 2019 में दुबई में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वर्ष 2021 में उन्होंने दुबई में एशियाई रिकॉर्ड कायम किया। इसके बाद टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। खेलों में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
‘दो स्वर्ण पदक जीतकर लौटने का संकल्प लिया था’
निषाद की मां पुष्पा देवी ने बताया कि जब उनका बेटा प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रवाना हुआ था, तब उसने दो स्वर्ण पदक जीतकर लौटने का संकल्प लिया था। अब दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर उसने अपने संकल्प को पूरा कर परिवार और गांव का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
निषाद कुमार की यह उपलब्धि न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठिन मेहनत और परिवार के सहयोग से बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है।
