पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल की शिकायत पर FIR; DIO ने ग्रांट मंजूर होने से किया इनकार, PGI चंडीगढ़ में उपचाराधीन है छात्र सर्वेश शर्मा
एएम नाथ। हमीरपुर। भारतीय सेना के लिए हाईटेक ड्रोन बनाने और प्रोजेक्ट के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने के दावे से चर्चा में आए हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा के मामले में पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल की शिकायत पर सदर थाना में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, छात्र को डिजिटल माध्यम से ऐसे संदेश भेजे गए, जिनसे उसे विश्वास हो गया कि उसके ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए ग्रांट मंजूर हो चुकी है।
पुलिस की ओर से 29 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन (DIO) से मिले आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया कि संस्था के रिकॉर्ड में न तो सर्वेश शर्मा और न ही उससे जुड़े किसी स्टार्टअप के लिए ऐसी ग्रांट मंजूर होने की जानकारी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर भ्रामक संदेश किसने भेजे और इस पूरे मामले के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
BNS और आईटी एक्ट की धाराओं में केस
हमीरपुर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 319 और 336(3) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत केस दर्ज किया है। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक पत्राचार और डिजिटल उपकरणों की पड़ताल की जा रही है, ताकि कथित धोखाधड़ी की कड़ियां जोड़ी जा सकें और जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके।
‘रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ प्रोजेक्ट से चर्चा में आया था छात्र
सर्वेश शर्मा राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज बड़ू में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं। पहले प्रकाशित खबरों में दावा किया गया था कि वह सेना के लिए ‘रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ नाम का ड्रोन विकसित कर रहे हैं। इसे सीमा पर निगरानी के लिए उपयोगी बताया गया था। खबरों में प्रोजेक्ट के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने और इसे आईआईटी रुड़की में विकसित किए जाने का भी उल्लेख किया गया था।
इन दावों के बाद सर्वेश चर्चा में आए थे। उनकी कथित उपलब्धि के लिए राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा सम्मानित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। अब DIO की ओर से ग्रांट मंजूर होने से इनकार किए जाने के बाद प्रोजेक्ट और उससे जुड़े दावों की सत्यता जांच के दायरे में है।
हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर घायल हुआ था छात्र
सर्वेश बुधवार को कॉलेज हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घटना की परिस्थितियों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन पुलिस के आधिकारिक प्रेस नोट में उनके गिरने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल इस घटना को ग्रांट संबंधी कथित धोखाधड़ी से जोड़ना उचित नहीं होगा।
हमीरपुर पुलिस ने लोगों और मीडिया से अपील की है कि वे बिना पुष्टि की जानकारी प्रसारित न करें और छात्र तथा उसके परिवार की निजता का सम्मान करें।
ग्रांट के संदेशों की आधिकारिक पुष्टि करने की सलाह
पुलिस ने विद्यार्थियों, नवाचार से जुड़े लोगों और शिक्षण संस्थानों को सलाह दी है कि सरकारी योजनाओं के तहत ग्रांट, चयन या वित्तीय सहायता मिलने के संदेशों की संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत कार्यालय से पुष्टि करें।
साइबर धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930, वेबसाइट cybercrime.gov.in या आपातकालीन सहायता नंबर 112 पर की जा सकती है।
जांच में इन पहलुओं की पड़ताल जरूरी
इस मामले में पुलिस के सामने प्रमुख सवाल हैं कि ग्रांट मंजूर होने के संदेश किसने भेजे, संबंधित दस्तावेज असली थे या नहीं और छात्र को वित्तीय सहायता मिलने का भरोसा किस आधार पर दिलाया गया। इसके साथ ही, छात्र के हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने की घटना की परिस्थितियों को भी तथ्यों और जांच के आधार पर स्पष्ट किया जाना जरूरी है। फिलहाल पुलिस जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
