चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अकाली राजनीति में एक और घटनाक्रम सामने आया है। वरिष्ठ अकाली नेता प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने अकाली दल पुनर्सुरजीत से इस्तीफा दे दिया है। पंथक एकता के उद्देश्य से गठित पार्टी में अब वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं। चंदूमाजरा ने अपने फैसले के पीछे पंथक एकता के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाने को मुख्य वजह बताया है।
मीडिया से बातचीत में प्रो. चंदूमाजरा ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में पंजाब और पंथ के हितों की रक्षा के लिए सभी पंथक और पंजाब समर्थक ताकतों का एकजुट होना बेहद जरूरी है। अकाली दल के अलग-अलग धड़ों में बंटे रहने से पंथक ताकतें कमजोर हो रही हैं और इसका लाभ पंथ विरोधी ताकतों को मिल रहा है।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह से विचारों में नहीं बनी सहमति
चंदूमाजरा ने कहा कि वह लंबे समय से अकाली दल के सभी धड़ों को एक मंच पर लाने की वकालत करते रहे हैं, ताकि पंजाब और पंथक हितों की मजबूती से पैरवी की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंथक एकता के मुद्दे पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह के साथ उनके विचारों में सहमति नहीं बन पाई। इसी वैचारिक मतभेद के चलते उन्होंने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा समय में अकाली राजनीति को मजबूत करने के लिए आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होना समय की जरूरत है। चंदूमाजरा के इस्तीफे से अकाली दल पुनर्सुरजीत के भीतर की स्थिति और पंजाब में अकाली दल के विभिन्न धड़ों को एक मंच पर लाने की कोशिशों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
