विधानसभा में हंगामा-नारेबाजी, निंदा प्रस्ताव पारित : विक्रमादित्य सिंह ने कहा मानसिक दिवालियापन की शिकार कंगना

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एएम नाथ । शिमला : किसानों पर भाजपा सांसद कंगना रणौत द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान को लेकर हिमाचल विधानसभा ने निंदा प्रस्ताव पारित किया। बयान पर सदन में खूब हंगामा हुआ। पक्ष और विपक्ष में नारेबाजी भी हुई। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के खंडन के बाद सदन में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने भी कंगना के बयान से किनारा करते हुए कहा कि कंगना का बयान उनका निजी मत है। पार्टी का इस बयान से कोई लेना-देना नहीं है।
इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कंगना के बयान को लेकर निंदा प्रस्ताव लाया। कहा कि कंगना चुनी हुई प्रतिनिधि हैं और उन्होंने विवादित बयान देकर हिमाचल के किसानों-बागवानों का भी अपमान किया है। सदन को इस मामले पर निंदा प्रस्ताव पास करना चाहिए। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि कंगना के बयान से माहौल बिगड़ने का खतरा है। हिमाचल में कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए मेरी मुख्यमंत्री से अपील है कि कंगना के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज करें। ठियोग से विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि कंगना के बयान से किसान-बागवान आहत हैं, कंगना नेता विपक्ष जयराम ठाकुर के क्षेत्र से आती हैं। उन्हें चुनाव जितवाने में जयराम ठाकुर ने खूब मेहनत की, लेकिन उनकी जुबान पर काबू नहीं रखवा पाए। इस बीच विपक्ष के विधायकों ने मामले पर बेवजह राजनीति करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस के विधायकों ने भी नारे लगाए।

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व ने भी कंगना के बयान का खंडन किया है। यह सदन भी इस बयान की निंदा करता है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि नियमों के अनुसार जो सदन में मौजूद नहीं है और अपना पक्ष नहीं रख सकता उसे लेकर सदन में चर्चा नहीं होनी चाहिए। इस मामले में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपना पक्ष साफ कर दिया है, प्रदेश भाजपा का भी वही पक्ष है।
मानसिक दिवालियापन की शिकार कंगना
विक्रमादित्यसदन के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि चुनी हुई प्रतिनिधि होकर किसानों पर दिए बयान से कंगना ने साफ कर दिया है कि वह मानसिक दिवालियापन की शिकार हैं। कूटनीतिक स्तर पर भी कंगना का बयान मुश्किलें बढ़ाने वाला है। वह कहती हैं-चीन और अमेरिका का दखल था। मोदी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह इतनी कमजोर है कि विदेशी ताकतें देश में दखल दे पा रही हैं।

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