चंडीगढ़, 7 सितंबर। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) के बकाया भुगतान को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान नवनियुक्त चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अदालत कानून के शासन के अनुसार काम करेगी और किसी भी तरह की रणनीति से न्यायपालिका की संस्था को दबाव में नहीं लाया जा सकता।
चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत पूरी तरह कानून के अनुसार चलेगी। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों ने संविधान की शपथ ली है और उन्हें पता है कि संविधान की रक्षा किस प्रकार करनी है।
कर्मचारियों ने 2 सितंबर को दायर की नई याचिका
DA के बकाया भुगतान को लेकर कर्मचारियों की ओर से 2 सितंबर को नई याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद पंजाब सरकार ने अभी तक कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित DA का भुगतान नहीं किया है।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अदालत के निर्देशों के अनुरूप अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कानून के शासन और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।
85 हजार कर्मचारियों को 60 प्रतिशत DA देने का ऐलान
इस बीच, पंजाब सरकार ने तीन दिन पहले 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती किए गए करीब 85 हजार कर्मचारियों को 60 प्रतिशत DA देने का ऐलान किया था। सरकार की ओर से इसे कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
हालांकि, कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से पहले से लंबित DA की किस्तों के भुगतान का मामला अभी भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
पंजाब के DA विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ?
लंबे समय से लंबित हैं DA की किस्तें
पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते की किस्तें जारी करने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर कर्मचारी संगठन लगातार प्रदर्शन और आंदोलन करते रहे हैं।
8 अप्रैल को सिंगल बेंच का आदेश
DA भुगतान को लेकर कर्मचारी हाईकोर्ट पहुंचे थे। 8 अप्रैल को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों का लंबित DA 30 जून तक जारी करने के निर्देश दिए थे।
सरकार ने आदेश को दी चुनौती
पंजाब सरकार ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ लेटर पेटेंट अपील (LPA) दायर की। सरकार का तर्क था कि सिंगल बेंच को इस प्रकार का आदेश जारी करने का अधिकार नहीं था।
3 अगस्त को हाईकोर्ट ने अपीलें खारिज कीं
3 अगस्त 2026 को कार्यवाहक चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने सरकार की अपीलों को खारिज करते हुए लंबित DA जारी करने संबंधी सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा।
दो सप्ताह में भुगतान के निर्देश
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और PSPCL को कर्मचारियों एवं पेंशनरों की लंबित DA किस्तें जारी करने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी कहा था कि बकाया भुगतान किए जाने तक पंजाब सरकार प्रिंट और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन जैसे गैर-उत्पादक खर्च से बचे।
1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
पंजाब सरकार ने 1 सितंबर को हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, सरकार की दायर SLP में कथित तौर पर 9 तकनीकी खामियां बताई गई हैं, जिन्हें दूर किया जाना बाकी है।
85 हजार कर्मचारियों के DA का अलग फैसला
इसके अलावा पंजाब सरकार ने जुलाई 2020 के बाद भर्ती करीब 85 हजार कर्मचारियों का DA 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से दिया जाना बाकी है।
अब निगाहें हाईकोर्ट की अगली कार्रवाई पर
DA के पुराने बकाए, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन और सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर चुनौती के बीच कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर अब मामले की आगे की सुनवाई पर है। हाईकोर्ट की सोमवार की टिप्पणी से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अदालत मामले में कानून और संविधान के अनुरूप प्रक्रिया को प्राथमिकता देगी।
